E20 पेट्रोल नीति पर बढ़ा विवाद: नितिन गडकरी को हटाने की मांग, 4 अगस्त को संसद तक मार्च करेंगे ट्रांसपोर्टर
“E20 पेट्रोल नीति को लेकर देश में सियासी और सामाजिक विवाद तेज हो गया है. दिल्ली के ट्रांसपोर्ट यूनियनों ने 4 अगस्त को संसद तक विरोध मार्च निकालने का ऐलान किया है, वहीं कांग्रेस ने नितिन गडकरी और हरदीप सिंह पुरी को पद से हटाने की मांग की है.”

देश में E20 पेट्रोल नीति को लेकर विवाद एक बार फिर तेज हो गया है. नीट-यूजी पेपर लीक मामले की गर्मी कम होने के बाद अब एथनॉल मिश्रित पेट्रोल नीति राजनीतिक और सामाजिक बहस का बड़ा मुद्दा बन गई है. आम आदमी पार्टी, कांग्रेस और कई ट्रांसपोर्ट संगठनों ने इस नीति को लेकर सरकार पर सवाल उठाए हैं. दिल्ली के ट्रांसपोर्ट यूनियनों ने 4 अगस्त को संसद तक विरोध मार्च निकालने का ऐलान किया है. वहीं उत्तर प्रदेश कांग्रेस ने केंद्रीय मंत्री नितिन गडकरी और हरदीप सिंह पुरी को पद से हटाने की मांग करते हुए जांच की मांग की है.
E20 नीति के विरोध में सड़क पर उतरेंगे ट्रांसपोर्टर
एथनॉल मिश्रित पेट्रोल यानी E20 नीति को लेकर देशभर में विरोध के स्वर तेज हो रहे हैं. दिल्ली के कई ट्रांसपोर्ट संगठनों ने इस नीति के खिलाफ आंदोलन शुरू करने का फैसला किया है. दिल्ली टैक्सी एंड टूरिस्ट ट्रांसपोर्टर्स एंड टूर ऑपरेटर्स एसोसिएशन समेत कई यूनियनों ने 4 अगस्त को संसद तक विरोध मार्च निकालने की घोषणा की है. संगठनों का कहना है कि E20 पेट्रोल के इस्तेमाल से वाहनों में तकनीकी समस्याओं की शिकायतें सामने आ रही हैं. यूनियन अध्यक्ष संजय सम्राट ने कहा कि इस प्रदर्शन का उद्देश्य सांसदों का ध्यान इस मुद्दे की ओर आकर्षित करना है. उन्होंने कहा कि देशभर के वाहन मालिकों की चिंताओं को सरकार तक पहुंचाने के लिए यह मार्च किया जा रहा है.
कांग्रेस ने नितिन गडकरी और हरदीप सिंह पुरी को हटाने की मांग की
E20 नीति को लेकर उत्तर प्रदेश कांग्रेस ने केंद्र सरकार पर हमला तेज कर दिया है. प्रदेश कांग्रेस कमेटी के अध्यक्ष अजय राय ने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी को पत्र लिखकर केंद्रीय सड़क परिवहन एवं राजमार्ग मंत्री नितिन गडकरी और पेट्रोलियम एवं प्राकृतिक गैस मंत्री हरदीप सिंह पुरी को पद से हटाने की मांग की है. अजय राय ने आरोप लगाया कि E20 नीति को लागू करने से पहले वाहन मालिकों की समस्याओं पर पर्याप्त ध्यान नहीं दिया गया. उन्होंने दावा किया कि देश के करोड़ों वाहन मालिक इस नीति को लेकर चिंतित हैं. कांग्रेस ने इस पूरे मामले की निष्पक्ष जांच कराने और सरकार की जवाबदेही तय करने की मांग भी उठाई है.
AAP का E20 नीति के खिलाफ राष्ट्रीय अभियान
आम आदमी पार्टी ने भी E20 पेट्रोल नीति के खिलाफ देशव्यापी अभियान शुरू करने का ऐलान किया है. पार्टी के राष्ट्रीय संयोजक अरविंद केजरीवाल ने दिल्ली में E20 नीति के खिलाफ आंदोलन की घोषणा की है. AAP की ओर से 1 अगस्त को दिल्ली के कॉन्स्टिट्यूशन क्लब में "National Town Hall Against E20" कार्यक्रम आयोजित करने की तैयारी है. इसमें ऑटोमोबाइल विशेषज्ञों, वाहन मालिकों और इस नीति से प्रभावित लोगों को शामिल किया जाएगा. केजरीवाल का दावा है कि E20 नीति वापस लेने की मांग को लेकर शुरू की गई ऑनलाइन याचिका पर बड़ी संख्या में लोगों ने समर्थन दिया है. पार्टी का कहना है कि वह इस मुद्दे को राष्ट्रीय स्तर पर उठाएगी.
ट्रांसपोर्ट यूनियन बोले- वाहन मालिकों की समस्याओं को नजरअंदाज किया जा रहा
दिल्ली के ट्रांसपोर्ट संगठनों का कहना है कि E20 पेट्रोल को लेकर वाहन मालिकों में कई तरह की चिंताएं हैं. दिल्ली टैक्सी एंड टूरिस्ट ट्रांसपोर्टर्स एसोसिएशन के अध्यक्ष संजय सम्राट ने कहा कि देश के अलग-अलग हिस्सों से इंजन और वाहनों से जुड़ी शिकायतें सामने आ रही हैं. उन्होंने कहा कि संसद तक निकाला जाने वाला मार्च किसी राजनीतिक दल से जुड़ा नहीं है. इसका उद्देश्य केवल वाहन मालिकों की समस्याओं को सरकार और सांसदों तक पहुंचाना है. ट्रांसपोर्ट संगठनों ने मांग की है कि E20 नीति की समीक्षा की जाए और इसके प्रभावों को लेकर स्पष्ट जानकारी सार्वजनिक की जाए.
E20 नीति को लेकर सोशल मीडिया विवाद और कानूनी कार्रवाई
E20 नीति को लेकर सोशल मीडिया पर भी बहस तेज हो गई है. इसी बीच बॉम्बे हाई कोर्ट ने केंद्रीय मंत्री नितिन गडकरी से जुड़े कथित मानहानिकारक और डीपफेक कंटेंट के खिलाफ कानूनी कार्रवाई की अनुमति दी है. E20 नीति को लेकर समर्थकों का कहना है कि एथनॉल मिश्रण से पेट्रोलियम आयात पर निर्भरता कम करने और किसानों को लाभ पहुंचाने में मदद मिल सकती है. वहीं विरोध करने वाले संगठन वाहनों की तकनीकी क्षमता और उपभोक्ताओं पर पड़ने वाले असर को लेकर सवाल उठा रहे हैं. इस मुद्दे पर राजनीतिक दलों और वाहन संगठनों के बीच बहस आने वाले दिनों में और तेज होने की संभावना है.
क्या है E20 पेट्रोल नीति?
E20 का मतलब है ऐसा पेट्रोल जिसमें 20 प्रतिशत तक एथनॉल मिलाया जाता है. सरकार का उद्देश्य पेट्रोलियम आयात को कम करना, जैव ईंधन को बढ़ावा देना और पर्यावरणीय लक्ष्यों को हासिल करना है. हालांकि, कुछ वाहन मालिक और संगठन पुराने वाहनों में इसके उपयोग को लेकर चिंता जता रहे हैं. उनका कहना है कि इसके प्रभावों को लेकर अधिक स्पष्टता और जागरूकता की जरूरत है. E20 नीति अब सिर्फ ईंधन नीति का मुद्दा नहीं रह गई है, बल्कि यह राजनीतिक बहस और जन आंदोलन का विषय बन चुकी है. आने वाले दिनों में ट्रांसपोर्ट यूनियनों के प्रदर्शन और राजनीतिक अभियानों के कारण यह मुद्दा और चर्चा में रह सकता है.


