26 वर्षों से मां दुर्गा की आराधना कर रहे बलराम पोद्दार, पत्नी प्रमिला देवी भी देती हैं साथ
झारखंड के देवघर जिले के सारवां प्रखंड स्थित मंझलाडीह निवासी बलराम पोद्दार पिछले 26 वर्षों से नवरात्र के नौ दिनों तक मां दुर्गा की आराधना कर रहे हैं. उनकी पत्नी प्रमिला देवी भी इस साधना में साथ निभाती हैं.

देवघर:- झारखंड के देवघर जिले के सारवां प्रखंड स्थित मंझलाडीह गांव के निवासी बलराम पोद्दार पिछले 26 वर्षों से नवरात्र के दौरान मां दुर्गा की आराधना में जुटे हुए हैं. उनके साथ उनकी पत्नी प्रमिला देवी भी पूरी श्रद्धा से पूजा-अर्चना में सहभागी बनती हैं. दोनों पति-पत्नी हर साल नवरात्र में कलश स्थापना के साथ नौ दिनों तक विधि-विधान से मां आदिशक्ति की उपासना करते हैं. इस दौरान बलराम पोद्दार अपने सामान्य सांसारिक कामकाज को किनारे रखकर पूजा और साधना में समय बिताते हैं.
बलराम पोद्दार के लिए नवरात्र केवल एक पर्व नहीं, बल्कि आस्था, आत्मिक शांति और मां के प्रति समर्पण का अवसर है. उनका कहना है कि मां दुर्गा की भक्ति से मन को शांति मिलती है और नई ऊर्जा का अनुभव होता है. वर्षों से चली आ रही यह परंपरा उनके जीवन में धार्मिक विश्वास की अहमियत को दर्शाती है. पूजा के दौरान मंत्रोच्चार और विभिन्न धार्मिक अनुष्ठानों से घर का माहौल भक्तिमय बना रहता है. पंडित बालमुकुंद पांडेय पूजा का विधि-विधान संपन्न करा रहे हैं.
26 वर्षों से निभा रहे नवरात्र की परंपरा
बलराम पोद्दार लगातार 26 वर्षों से नवरात्र के नौ दिनों तक मां दुर्गा की आराधना करते आ रहे हैं. हर साल पर्व शुरू होते ही वह पूजा-पाठ के लिए अपना समय निर्धारित करते हैं और पूरी श्रद्धा के साथ धार्मिक अनुष्ठानों में शामिल होते हैं. लंबे समय से जारी यह साधना उनके अटूट विश्वास और नियमित पूजा परंपरा को दर्शाती है.
पत्नी प्रमिला देवी भी रहती हैं साथ
इस धार्मिक साधना में उनकी पत्नी प्रमिला देवी की भी महत्वपूर्ण भूमिका है. दोनों पति-पत्नी मिलकर कलश स्थापना से लेकर नौ दिनों तक पूजा के विभिन्न नियमों का पालन करते हैं. साथ में आराधना करने की यह परंपरा उनके आपसी सहयोग और साझा आस्था को भी सामने लाती है. नवरात्र के दौरान दोनों मां आदिशक्ति की उपासना में समय समर्पित करते हैं.
कलश स्थापना के साथ शुरू होती है पूजा
नवरात्र की शुरुआत कलश स्थापना के साथ होती है. इसके बाद नौ दिनों तक विधि-विधान से मां दुर्गा की पूजा-अर्चना की जाती है. बलराम पोद्दार के यहां भी धार्मिक परंपराओं के अनुसार अनुष्ठान संपन्न कराए जाते हैं. पंडित बालमुकुंद पांडेय मंत्रोच्चार और पूजा की प्रक्रिया पूरी कराते हैं. इस दौरान घर में भक्ति और आध्यात्मिकता का माहौल बना रहता है.
मां की भक्ति से मिलती है मानसिक शांति
बलराम पोद्दार का मानना है कि मां आदिशक्ति की आराधना से मन शांत होता है और भीतर सकारात्मक ऊर्जा का संचार होता है. उनके अनुसार, पूजा उनके लिए किसी प्रदर्शन का माध्यम नहीं, बल्कि जीवन का अभिन्न हिस्सा है. वह नवरात्र को आत्मचिंतन, भक्ति और मां के प्रति विश्वास व्यक्त करने का विशेष अवसर मानते हैं.
जीवनभर मां की सेवा करने का संकल्प
बलराम पोद्दार कहते हैं कि जब तक मां शरीर में शक्ति देंगी, वह नवरात्र के नौ दिनों तक अपने कामकाज को छोड़कर भक्ति में लीन रहेंगे. उनका यह संकल्प वर्षों से जारी पूजा परंपरा के प्रति समर्पण को दर्शाता है. बलराम पोद्दार और प्रमिला देवी की यह साधना नवरात्र के अवसर पर आस्था, दांपत्य सहभागिता और आध्यात्मिक विश्वास का संदेश देती है.




