उत्तराखंड में मॉनसून का कहर: बद्रीनाथ हाईवे बंद, नदियां उफान पर, कई जिलों में भूस्खलन से जनजीवन प्रभावित
उत्तराखंड में लगातार हो रही भारी बारिश से हालात बिगड़ गए हैं. बद्रीनाथ हाईवे समेत कई प्रमुख सड़कें भूस्खलन के कारण बंद हैं, नदियां उफान पर हैं और कई जिलों में स्कूल बंद कर दिए गए हैं. प्रशासन ने चारधाम यात्रियों और पर्यटकों से अनावश्यक यात्रा से बचने की सलाह दी है.


Uttrakhand: मॉनसून ने रफ्तार पकड़ ली है और लगातार हो रही मूसलाधार बारिश ने कई जिलों में जनजीवन प्रभावित कर दिया है. भारी बारिश के चलते नदियां उफान पर हैं, पहाड़ी इलाकों में भूस्खलन की घटनाएं बढ़ गई हैं और कई प्रमुख सड़कें बंद हो गई हैं. चमोली में गुलाबकोटी के पास बद्रीनाथ नेशनल हाईवे मलबा आने से बंद हो गया है, जबकि रुद्रप्रयाग में भी ऋषिकेश-बद्रीनाथ हाईवे बाधित है. मौसम विभाग ने कई जिलों में भारी बारिश का अलर्ट जारी किया है. बागेश्वर में ऑरेंज अलर्ट के चलते स्कूल और आंगनबाड़ी केंद्र बंद कर दिए गए हैं. सुरक्षा को देखते हुए ऋषिकेश में रिवर राफ्टिंग पर रोक लगा दी गई है और केदारनाथ के लिए हेलीकॉप्टर सेवाएं भी फिलहाल स्थगित कर दी गई हैं. प्रशासन लगातार हालात पर नजर बनाए हुए है और लोगों से अनावश्यक यात्रा से बचने की अपील कर रहा है.
बद्रीनाथ हाईवे बंद, चारधाम यात्रा पर असर
लगातार बारिश के कारण चमोली जिले के गुलाबकोटी क्षेत्र में भारी मलबा आने से बद्रीनाथ नेशनल हाईवे बंद हो गया है. सड़क खोलने के लिए प्रशासन और संबंधित विभाग युद्धस्तर पर राहत कार्य में जुटे हैं. वहीं रुद्रप्रयाग जिले में धारी देवी के पास सिरोबगड़ क्षेत्र में भी ऋषिकेश-बद्रीनाथ हाईवे भूस्खलन के कारण बाधित हो गया, जिससे चारधाम यात्रा पर निकले कई श्रद्धालु रास्ते में फंस गए. मौसम खराब होने के चलते केदारनाथ धाम के लिए संचालित सभी हेलीकॉप्टर सेवाओं को 5 जुलाई तक स्थगित कर दिया गया है. प्रशासन का कहना है कि यात्रियों की सुरक्षा सर्वोच्च प्राथमिकता है और मौसम की स्थिति सामान्य होने के बाद ही सेवाएं बहाल की जाएंगी. श्रद्धालुओं को यात्रा से पहले मौसम और मार्ग की जानकारी लेने की सलाह दी गई है.
बागेश्वर में स्कूल बंद, कई गांवों का संपर्क टूटा
बागेश्वर जिले में लगातार हो रही मूसलाधार बारिश से हालात गंभीर हो गए हैं. पहाड़ों से मलबा आने के कारण 14 ग्रामीण सड़कें बंद हो गई हैं, जिससे लगभग 50 गांवों का संपर्क प्रभावित हुआ है. कई इलाकों में बिजली आपूर्ति भी बाधित हो गई है. मौसम विभाग के ऑरेंज अलर्ट को देखते हुए जिला प्रशासन ने कक्षा 1 से 12 तक के सभी स्कूलों और आंगनबाड़ी केंद्रों में अवकाश घोषित किया है. प्रशासन जेसीबी मशीनों की मदद से मलबा हटाने और सड़कें खोलने में जुटा है. अधिकारियों ने लोगों से नदी-नालों के किनारे जाने से बचने और मौसम विभाग की सलाह का पालन करने की अपील की है. जिले में लगातार निगरानी रखी जा रही है ताकि किसी भी आपात स्थिति में तुरंत राहत पहुंचाई जा सके.
टिहरी और अन्य जिलों में भूस्खलन से सड़कें बाधित
टिहरी जिले में लगातार बारिश के कारण कई नदी-नाले उफान पर हैं और भूस्खलन की घटनाओं में तेजी आई है. भिलंगना क्षेत्र के नैलचामी गाड़ में जलस्तर बढ़ने से प्रशासन सतर्क हो गया है. नरेंद्रनगर–रानीपोखरी राज्य मार्ग पर गुजराड़ा क्षेत्र में पहाड़ी से मलबा और पत्थर गिरने के कारण यातायात रोकना पड़ा. वहीं राष्ट्रीय राजमार्ग-34 पर नगुण बैंड के पास भी भूस्खलन से सड़क बंद हो गई. पुलिस और प्रशासन ने तत्काल बैरिकेडिंग कर लोगों की आवाजाही रोकी तथा जेसीबी मशीनों की मदद से मलबा हटाने का कार्य शुरू कराया. अधिकारियों ने लोगों से अनावश्यक यात्रा से बचने और किसी भी आपात स्थिति में पुलिस हेल्पलाइन 112 पर संपर्क करने की अपील की है.
राफ्टिंग पर रोक, पहाड़ों से गिर रहीं चट्टानें
गंगा नदी का जलस्तर बढ़ने के बाद ऋषिकेश में रिवर राफ्टिंग गतिविधियों पर अस्थायी प्रतिबंध लगा दिया गया है. इसके बावजूद कुछ पर्यटक और राफ्ट संचालक नदी में उतरते दिखाई दिए, जिस पर प्रशासन ने सख्ती बरतने की बात कही है. दूसरी ओर विकासनगर के यमुनोत्री-उत्तरकाशी नेशनल हाईवे पर बारिश के दौरान पहाड़ी से एक विशाल चट्टान चलती कार पर गिर गई. हादसे में कार पूरी तरह क्षतिग्रस्त हो गई, लेकिन उसमें सवार परिवार सुरक्षित बच गया. पुलिस, SDRF और राहत टीमों ने मौके पर पहुंचकर यात्रियों को बाहर निकाला और सड़क से मलबा हटाकर यातायात बहाल कराया. मौसम विभाग ने अगले कुछ दिनों तक राज्य के कई हिस्सों में भारी बारिश की संभावना जताई है और लोगों से सावधानी बरतने की अपील की है.

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