डीडी बार मर्डर केस में राजनीति का ओवरडोज? जिस हिमांशु के लिए लड़ रहे थे आदित्य साहू ने उसका नाम तक नहीं लिया!
डीडी बार हत्याकांड को लेकर भाजपा ने राज्यपाल से CBI जांच, दोषियों पर सख्त कार्रवाई और पीड़ित परिवार को सरकारी नौकरी देने की मांग की. हालांकि, राजभवन से बाहर भाजपा प्रदेश अध्यक्ष आदित्य साहू के बयान में मृतक हिमांशु सिंह और घायल प्रत्युष आनंद का नाम नहीं आने से नई बहस छिड़ गई.

Ranchi: जमशेदपुर के डीडी बार के बाहर हुई हिमांशु सिंह की हत्या अब सिर्फ एक आपराधिक मामला नहीं, बल्कि झारखंड की राजनीति का बड़ा मुद्दा बन चुकी है. इस मामले को लेकर मंगलवार को भाजपा का प्रतिनिधिमंडल राजभवन पहुंचा. प्रतिनिधिमंडल में मृतक हिमांशु सिंह के पिता अरविंद सिंह भी शामिल थे. भाजपा ने राज्यपाल को ज्ञापन सौंपकर मामले की CBI जांच, दोषियों पर सख्त कार्रवाई और पीड़ित परिवार के एक सदस्य को सरकारी नौकरी देने की मांग की. हालांकि, राजभवन से बाहर आने के बाद भाजपा प्रदेश अध्यक्ष आदित्य साहू के बयान ने एक अलग बहस छेड़ दी. उन्होंने कानून-व्यवस्था, पुलिस और जांच पर सवाल उठाए, लेकिन जिस हिमांशु सिंह के लिए न्याय मांगने पहुंचे थे, उसका नाम तक अपने पूरे बयान में नहीं लिया. घायल प्रत्युष आनंद और मृतक के पिता अरविंद सिंह का भी जिक्र नहीं किया. ऐसे में सवाल उठने लगे हैं कि क्या राजनीतिक लड़ाई में असली पीड़ित कहीं पीछे तो नहीं छूट रहे?
CBI जांच की मांग, लेकिन बयान में नहीं आया हिमांशु और प्रत्युष का नाम
राज्यपाल से मुलाकात के बाद भाजपा प्रदेश अध्यक्ष आदित्य साहू ने मीडिया से बातचीत में कहा कि डीडी बार हत्याकांड की निष्पक्ष जांच होनी चाहिए. उन्होंने मामले की CBI जांच कराने, दोषियों के खिलाफ कड़ी कार्रवाई करने और घटनास्थल पर मौजूद पुलिसकर्मियों की भूमिका की भी जांच की मांग उठाई. उनका कहना था कि पुलिस की मौजूदगी में दो युवकों पर हमला हुआ, इसलिए मौके पर तैनात पुलिसकर्मियों की जवाबदेही भी तय होनी चाहिए. हालांकि, उनके पूरे बयान में एक बात सबसे ज्यादा चर्चा का विषय बन गई. जिस हिमांशु सिंह की हत्या को लेकर भाजपा लगातार सरकार को घेर रही है, उस हिमांशु का नाम तक प्रदेश अध्यक्ष की जुबान पर नहीं आया. घायल प्रत्युष आनंद का भी जिक्र नहीं हुआ. जबकि मृतक के पिता अरविंद सिंह स्वयं भाजपा प्रतिनिधिमंडल के साथ राज्यपाल से मिलने पहुंचे थे. इसे लेकर अब राजनीतिक और सामाजिक स्तर पर सवाल उठ रहे हैं कि क्या मुद्दा बड़ा हो गया और पीड़ितों की पहचान पीछे छूट गई?
पिता की आवाज में बेटे को खोने का दर्द
राजभवन से बाहर निकलने के बाद मृतक हिमांशु सिंह के पिता अरविंद सिंह ने मीडिया से बातचीत की. उन्होंने कहा कि राज्यपाल ने निष्पक्ष जांच और दोषियों को सजा दिलाने का आश्वासन दिया है. लेकिन बातचीत के दौरान बार-बार उनका दर्द सामने आता रहा. उन्होंने कहा कि उनका बेटा पुलिस के सामने तड़पता रहा, फिर भी उसे समय पर नहीं बचाया जा सका. एक पिता की यह पीड़ा पूरे मामले को राजनीतिक आरोप-प्रत्यारोप से अलग एक मानवीय सवाल की ओर ले जाती है. आखिर यदि घटनास्थल पर पुलिस मौजूद थी तो हालात इस स्तर तक कैसे पहुंचे? घायल प्रत्युष आनंद को समय पर मदद क्यों नहीं मिली? क्या सुरक्षा व्यवस्था में कहीं गंभीर चूक हुई? ये सवाल अब भी जवाब का इंतजार कर रहे हैं.
राजनीति से आगे बढ़कर जवाब मांग रहा है यह मामला
डीडी बार मर्डर केस में पुलिस ने बार संचालक और भाजपा नेता नीरज सिंह सहित कई आरोपियों को गिरफ्तार किया है. जांच आगे बढ़ रही है और मुख्य आरोपियों की तलाश भी जारी है. लेकिन दूसरी ओर यह मामला लगातार राजनीतिक रंग लेता जा रहा है. भाजपा सरकार पर कानून-व्यवस्था को लेकर हमला बोल रही है, जबकि सत्तापक्ष अपने जवाब दे रहा है. इन सबके बीच सबसे बड़ा सवाल वही है, जो हिमांशु सिंह के पिता की आंखों में दिखाई देता है—क्या उनके बेटे को न्याय मिलेगा? राजनीतिक बयान, ज्ञापन और प्रदर्शन अपनी जगह हैं, लेकिन इस पूरे घटनाक्रम का केंद्र एक परिवार का दर्द और एक घायल युवक का संघर्ष है. ऐसे में उम्मीद यही रहेगी कि जांच निष्पक्ष हो, दोषियों को सजा मिले और यह मामला सिर्फ राजनीतिक बहस बनकर सीमित न रह जाए.

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