अमेरिका का खाना छोड़ Norway टीम क्यों लाई 580 किलो मछली और चीज़?
Norway फुटबॉल टीम World Cup 2026 में 580 किलो खास खाद्य सामग्री लेकर अमेरिका पहुंची है. 1000 किलो खाना लाने की वायरल खबर गलत निकली। जानिए खिलाड़ियों की डाइट और इस तैयारी के पीछे की असली वजह.


FIFA World Cup 2026 में 28 साल बाद वापसी कर रही नॉर्वे फुटबॉल टीम अपने खेल के साथ-साथ अपने खाने को लेकर भी चर्चा का विषय बनी हुई है. सोशल मीडिया पर यह दावा किया गया था कि टीम अमेरिका में 1000 किलो खाना लेकर पहुंची है. इस खबर ने लोगों के बीच यह बहस छेड़ दी कि क्या नॉर्वे के खिलाड़ियों को अमेरिका का खाना पसंद नहीं है. लेकिन अब टीम के हेड शेफ ने सच्चाई का खुलासा कर दिया है. नॉर्वे टीम के हेड शेफ आरॉन एस्पेलैंड ने साफ किया कि टीम अपने साथ करीब 580 किलो खास खाद्य सामग्री लेकर आई है, न कि 1000 किलो। उन्होंने बताया कि वायरल हो रही कई बातें गलत थीं, जिनमें यह भी शामिल था कि टीम संतरे भी लेकर आई है.
टीम अपने साथ क्या-क्या लेकर आई?
हेड शेफ के अनुसार, नॉर्वे की टीम ने अमेरिका में खिलाड़ियों की डाइट का खास ख्याल रखते हुए कुछ विशेष खाद्य सामग्री अपने साथ लाई है. इसमें लगभग 300 किलो नॉर्वेजियन साल्मन और ट्राउट मछली, 100 किलो हेलिबट मछली, 80 किलो नॉर्वेजियन ब्राउन चीज़ और 100 किलो जार्ल्सबर्ग चीज़ शामिल हैं. इसका मतलब है कि टीम कुल 400 किलो मछली और 180 किलो चीज़ लेकर पहुंची है. इसके अलावा, तीन प्रोफेशनल शेफ भी खिलाड़ियों के साथ अमेरिका गए हैं, ताकि उनकी जरूरतों और पसंद के अनुसार भोजन तैयार किया जा सके. आरॉन एस्पेलैंड ने यह भी स्पष्ट किया कि खिलाड़ियों को हर सुबह ताजा संतरे का जूस दिया जाता है, लेकिन इसके लिए इस्तेमाल होने वाले संतरे अमेरिका के स्थानीय बाजार से खरीदे जाते हैं. सोशल मीडिया पर फैली यह खबर कि टीम संतरे भी नॉर्वे से लेकर आई है, पूरी तरह से गलत थी.
आखिर खिलाड़ियों के लिए अपनी डाइट इतनी जरूरी क्यों होती है?
फुटबॉल जैसे हाई-इंटेंसिटी खेल में खिलाड़ियों की फिटनेस पूरी तरह से उनके खान-पान पर निर्भर करती है. लगातार ट्रेनिंग, लंबी यात्राएं और कम समय में कई मुकाबले खेलने के चलते खिलाड़ियों को प्रोटीन, हेल्दी फैट और संतुलित कार्बोहाइड्रेट की जरूरत होती है. नॉर्वे की प्रसिद्ध साल्मन और ट्राउट मछली प्रोटीन और ओमेगा-3 फैटी एसिड से भरपूर होती हैं, जबकि चीज़ खिलाड़ियों को अतिरिक्त ऊर्जा प्रदान करने में मदद करता है. घर जैसा खाना मिलने से खिलाड़ियों का मानसिक आत्मविश्वास भी बेहतर बना रहता है. स्पोर्ट्स डाइटिशियन एमी गुडसन के अनुसार, अंतरराष्ट्रीय टूर्नामेंट में अपनी पसंदीदा और भरोसेमंद खाद्य सामग्री साथ ले जाना एकदम सामान्य है. उनका कहना है कि सही पोषण खिलाड़ियों की ऊर्जा, रिकवरी, हाइड्रेशन, इम्यूनिटी और मैदान पर निर्णय लेने की क्षमता को सीधे प्रभावित करता है.
अमेरिका के खाने पर नहीं, सिर्फ परफॉर्मेंस पर है फोकस
नॉर्वे टीम के हेड शेफ ने स्पष्ट किया कि उनकी टीम अमेरिका के स्थानीय खाद्य पदार्थों का भी इस्तेमाल कर रही है. कुछ पारंपरिक नॉर्वेजियन उत्पाद इसलिए लाए गए हैं ताकि खिलाड़ी familiar स्वाद और संतुलित पोषण के साथ बेहतर प्रदर्शन कर सकें. उन्होंने बताया कि विश्व कप जैसे बड़े टूर्नामेंट में खिलाड़ियों को शारीरिक और मानसिक दोनों ही दृष्टिकोण से सहज महसूस कराना बहुत जरूरी है. यही कारण है कि आजकल की फुटबॉल रणनीति सिर्फ मैदान तक सीमित नहीं रहती, बल्कि खिलाड़ियों की डाइट और रिकवरी पर भी उतना ही ध्यान दिया जाता है. नॉर्वे की यह तैयारी यह दर्शाती है कि विश्व कप जैसे बड़े टूर्नामेंट में सफलता केवल प्रतिभा पर निर्भर नहीं करती, बल्कि हर छोटी-बड़ी योजना और वैज्ञानिक तैयारी भी महत्वपूर्ण होती है.

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