जिस ‘भवानी अष्टकम्’ को पीएम मोदी ने शेयर किया, उसे गाने वाली झारखंड की माधवी मधुकर झा कौन हैं? जानिए पूरी कहानी
500 से अधिक संस्कृत स्तोत्रों को आवाज दे चुकी हैं माधवी मधुकर झा, ‘भवानी अष्टकम्’ का लिंक प्रधानमंत्री ने नवरात्रि पर किया साझा; ‘पंचायत-3’ के सोहर गीत से भी मिली थी व्यापक पहचान.

Godda: गोड्डा से जुड़ी गायिका माधवी मधुकर झा एक बार फिर चर्चा में हैं. इस बार वजह है प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी का वह सोशल मीडिया पोस्ट, जिसमें उन्होंने नवरात्रि की पावन षष्ठी पर आदि शंकराचार्य रचित संस्कृत स्तोत्र ‘भवानी अष्टकम्’ का यूट्यूब लिंक साझा किया. इस स्तोत्र को माधवी मधुकर झा ने अपनी आवाज दी है. प्रधानमंत्री ने मां कात्यायनी के श्रीचरणों में नमन करते हुए कामना की कि उनकी कृपा से सभी के जीवन में शक्ति, साहस और सकारात्मक ऊर्जा का संचार हो. बीजेपी झारखंड ने भी माधवी की इस उपलब्धि को झारखंड की सांस्कृतिक प्रतिभा और समृद्ध संस्कृत परंपरा के लिए गौरव का क्षण बताया है. पार्टी के मुताबिक, माधवी 500 से अधिक संस्कृत स्तोत्रों को अपनी आवाज दे चुकी हैं. लेकिन माधवी की पहचान सिर्फ इस एक प्रस्तुति तक सीमित नहीं है. संस्कृत संगीत बैंड ‘मधुरम वृंद’, अयोध्या में राम मंदिर प्राण-प्रतिष्ठा के दौरान प्रस्तुति और वेब सीरीज ‘पंचायत-3’ के चर्चित मैथिली सोहर गीत से भी वह अपनी अलग पहचान बना चुकी हैं.
पीएम मोदी का संदेश, बीजेपी झारखंड में क्या लिखा
प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने 16 अक्टूबर 2026 को नवरात्रि की षष्ठी पर मां कात्यायनी को नमन करते हुए लिखा कि उनकी अनुकंपा से हर किसी के जीवन में असीम शक्ति, साहस और सकारात्मक ऊर्जा का संचार हो. इसी संदेश के साथ उन्होंने माधवी मधुकर झा की आवाज में ‘भवानी अष्टकम्’ का यूट्यूब लिंक साझा किया. इस तरह उनकी प्रस्तुति को देश के प्रधानमंत्री के सोशल मीडिया अकाउंट पर जगह मिली. वहीं बीजेपी झारखंड ने अपने सोशल मीडिया अकाउंट पर लिखा: झारखंड की बेटी की आवाज को मिला प्रधानमंत्री मोदी जी का सम्मान! पावन नवरात्रि के अवसर पर माननीय प्रधानमंत्री श्री नरेंद्र मोदी जी ने माधवी मधुकर झा द्वारा गाए गए आदि शंकराचार्य रचित संस्कृत स्तोत्र ‘भवानी अष्टकम्’ को अपने सोशल मीडिया अकाउंट पर साझा किया. 500 से अधिक संस्कृत स्तोत्रों को अपनी आवाज़ दे चुकीं माधवी मधुकर झा की यह उपलब्धि झारखंड की सांस्कृतिक प्रतिभा और समृद्ध संस्कृत परंपरा के लिए गौरव का क्षण है. झारखंड की बेटी की प्रतिभा को राष्ट्रीय मंच पर मिली इस पहचान के लिए हार्दिक बधाई एवं शुभकामनाएँ!
कौन हैं माधवी मधुकर झा, कहां से शुरू हुआ सफर?
माधवी मधुकर झा का जन्म बिहार के भागलपुर जिले के सबौर में हुआ. उनका मायका भागलपुर में है, जबकि ससुराल झारखंड के गोड्डा जिले के पोड़ैयाहाट प्रखंड के डांडे गांव में है. इसी रिश्ते के कारण उन्हें गोड्डा की बहू के रूप में भी जाना जाता है. उनके पति पीयूष झा हैं. सार्वजनिक रिपोर्टों में उनके परिवार और शुरुआती जीवन से जुड़ी विस्तृत जानकारी सीमित है, लेकिन संगीत के क्षेत्र में उनकी यात्रा ने उन्हें राष्ट्रीय स्तर पर पहचान दिलाई है. माधवी ने संस्कृत की पारंपरिक रचनाओं को संगीत के माध्यम से लोगों तक पहुंचाने पर खास ध्यान दिया. उन्होंने आदि शंकराचार्य सहित विभिन्न रचनाकारों के स्तोत्रों को अपनी आवाज दी. उनकी प्रस्तुतियों की खासियत संस्कृत के श्लोकों को लयबद्ध और संगीतमय रूप में पेश करना है, ताकि श्रोता इन रचनाओं से जुड़ सकें. बीजेपी झारखंड के अनुसार, वह अब तक 500 से अधिक संस्कृत स्तोत्रों को आवाज दे चुकी हैं. माधवी की पहचान केवल धार्मिक संगीत तक ही सीमित नहीं रही. उन्होंने लोकप्रिय वेब सीरीज ‘पंचायत-3’ में मैथिली सोहर गीत को भी अपनी आवाज दी. इस गीत ने इंटरनेट पर व्यापक लोकप्रियता हासिल की और उन्हें उन श्रोताओं के बीच भी पहचान मिली, जो पहले उनके संस्कृत स्तोत्रों से परिचित नहीं थे.
‘मधुरम वृंद’ से संस्कृत संगीत को नई पहचान
माधवी मधुकर झा संस्कृत संगीत बैंड ‘मधुरम वृंद’ से भी जुड़ी हैं. इस बैंड के जरिए संस्कृत की प्राचीन रचनाओं को संगीत के आधुनिक स्वरूप में प्रस्तुत किया जाता है. उनका काम इस मायने में खास है कि संस्कृत के स्तोत्रों को केवल धार्मिक अनुष्ठानों या पारंपरिक पाठ तक सीमित रखने के बजाय डिजिटल मंचों और संगीत कार्यक्रमों के जरिए व्यापक श्रोता वर्ग तक पहुंचाया गया है.जनवरी 2024 में अयोध्या में रामलला की प्राण-प्रतिष्ठा से जुड़े आयोजन के दौरान माधवी ने अपने बैंड के साथ प्रस्तुति दी थी. इस कार्यक्रम ने उन्हें राष्ट्रीय स्तर पर पहचान दिलाने में अहम भूमिका निभाई. उनकी प्रस्तुतियां मंदिरों और सांस्कृतिक आयोजनों में भी सुनने को मिली हैं. मीडिया रिपोर्टों के मुताबिक, वह भारत सरकार के संस्कृति मंत्रालय की पैनल गायिकाओं में भी शामिल रही हैं. माधवी की प्रस्तुतियों में कनकधारा स्तोत्रम्, श्री राम रक्षा स्तोत्रम्, श्री पार्वतीवल्लभ अष्टकम्, वेदसार शिवस्तवः और कृष्णाष्टकम् जैसी रचनाएं शामिल हैं. इन स्तोत्रों के जरिए उन्होंने संस्कृत की धार्मिक और साहित्यिक परंपरा को संगीत के माध्यम से लोगों तक पहुंचाया है.
यूट्यूब पर करोड़ों व्यूज, ‘पंचायत-3’ के सोहर गीत ने भी मचाई धूम
माधवी मधुकर झा की लोकप्रियता का अंदाजा उनके यूट्यूब चैनल और अलग-अलग प्रस्तुतियों को मिले व्यूज से लगाया जा सकता है. उनके संस्कृत स्तोत्रों को बड़ी संख्या में लोग सुनते हैं. उनके चैनल के आंकड़ों पर नजर रखने वाली तृतीय-पक्ष वेबसाइटों के मुताबिक, अक्टूबर 2026 में उनके यूट्यूब चैनल पर करीब 11 लाख से अधिक सब्सक्राइबर और कुल 69 करोड़ से ज्यादा व्यूज दर्ज किए गए थे. ये आंकड़े समय के साथ बदलते रहते हैं. उनकी चर्चित प्रस्तुतियों में कनकधारा स्तोत्रम्, श्री राम रक्षा स्तोत्रम्, गीत गोविंदम् और श्री पार्वतीवल्लभ अष्टकम् शामिल हैं. इन रचनाओं को यूट्यूब पर करोड़ों बार देखा और सुना गया है. वहीं, प्रधानमंत्री मोदी द्वारा साझा किए गए ‘भवानी अष्टकम्’ की प्रस्तुति भी उनके चर्चित कामों में शामिल है. 2024 में जारी इस प्रस्तुति को अक्टूबर 2026 की रिपोर्टों में 80 लाख से अधिक व्यूज मिलने का उल्लेख किया गया. माधवी को व्यापक पहचान दिलाने वाली दूसरी प्रस्तुति ‘पंचायत-3’ का मैथिली सोहर गीत है. यह गीत भगवान श्रीकृष्ण के जन्म और बाल लीलाओं पर आधारित है. इसके बोल मैथिली लोक परंपरा से जुड़े हैं और इसे शिव कुमार झा टिल्लू ने लिखा है. जून 2024 में प्रकाशित एक रिपोर्ट के अनुसार, इस गीत को तब तक 12 करोड़ से अधिक बार देखा और सुना जा चुका था. इस गीत की लोकप्रियता ने माधवी की आवाज को संस्कृत संगीत के श्रोताओं से आगे भी पहुंचाया.
झारखंड के लिए क्यों खास है यह पहचान?
माधवी मधुकर झा की उपलब्धि को झारखंड से जोड़कर देखा जा रहा है, क्योंकि उनका ससुराल गोड्डा जिले के डांडे गांव में है. बीजेपी झारखंड ने प्रधानमंत्री द्वारा ‘भवानी अष्टकम्’ साझा किए जाने को राज्य की सांस्कृतिक प्रतिभा और समृद्ध संस्कृत परंपरा के लिए गौरव का क्षण बताया है. इस पोस्ट के जरिए पार्टी ने उनकी उपलब्धि को राज्य की बेटी की राष्ट्रीय पहचान के रूप में पेश किया. माधवी की यात्रा में संस्कृत स्तोत्रों के साथ-साथ मैथिली लोकगीत भी अहम रहे हैं. एक ओर उन्होंने आदि शंकराचार्य की रचनाओं को आवाज दी, वहीं दूसरी ओर ‘पंचायत-3’ के सोहर गीत के जरिए लोक संगीत के श्रोताओं तक पहुंचीं. अयोध्या में रामलला की प्राण-प्रतिष्ठा से जुड़े कार्यक्रम में प्रस्तुति और अब प्रधानमंत्री मोदी द्वारा उनकी गायकी का लिंक साझा किया जाना, उनके काम को मिली व्यापक पहचान के दो महत्वपूर्ण पड़ाव हैं. उनके संघर्ष, निजी जीवन और पुरस्कारों की पूरी सूची के बारे में सार्वजनिक रूप से सत्यापित जानकारी सीमित है. इसलिए किसी अपुष्ट सम्मान या निजी संघर्ष की कहानी जोड़ने के बजाय उनकी दर्ज प्रस्तुतियों और उपलब्धियों पर ध्यान देना जरूरी है. फिलहाल, प्रधानमंत्री की पोस्ट ने माधवी मधुकर झा को एक बार फिर चर्चा में ला दिया है और संस्कृत स्तोत्र गायन के जरिए अपनी पहचान बनाने वाली इस गायिका के काम को राष्ट्रीय मंच पर नई दृश्यता मिली है.


