केरल में तेजस्वी का ‘इंग्लिश अवतार’ बना सियासी मुद्दा, बिहार में बयान पर बवाल
“केरल की सियासत की गर्माहट अब बिहार की राजनीति तक पहुंचती नजर आ रही है. आरजेडी नेता और बिहार के पूर्व उपमुख्यमंत्री तेजस्वी यादव इन दिनों पांच दिवसीय केरल दौरे पर हैं, जहां वे अपनी पार्टी के उम्मीदवारों के साथ-साथ वाम लोकतांत्रिक मोर्चा (एलडीएफ) के पक्ष में भी प्रचार कर रहे हैं.”

Kerala: केरल की सियासत की गर्माहट अब बिहार की राजनीति तक पहुंचती नजर आ रही है. आरजेडी नेता और बिहार के पूर्व उपमुख्यमंत्री तेजस्वी यादव इन दिनों पांच दिवसीय केरल दौरे पर हैं, जहां वे अपनी पार्टी के उम्मीदवारों के साथ-साथ वाम लोकतांत्रिक मोर्चा (एलडीएफ) के पक्ष में भी प्रचार कर रहे हैं. खास बात यह है कि तेजस्वी यादव के अंग्रेजी में दिए जा रहे धाराप्रवाह भाषणों ने राजनीतिक हलकों में नई बहस छेड़ दी है. समर्थक इसे उनके आत्मविश्वास और बदलती छवि का प्रतीक बता रहे हैं, जबकि विरोधी इस पर सवाल उठा रहे हैं. तेजस्वी यादव लंबे समय से अपनी शैक्षणिक योग्यता को लेकर आलोचनाओं का सामना करते रहे हैं, लेकिन केरल में उनके प्रभावशाली अंग्रेजी भाषणों ने इस धारणा को चुनौती दी है. वे सीपीएम और सीपीआई के नेताओं के साथ मंच साझा कर रहे हैं और दक्षिण भारतीय मतदाताओं से जुड़ने के लिए अंग्रेजी भाषा का प्रभावी इस्तेमाल कर रहे हैं. उनके भाषणों के वीडियो सोशल मीडिया पर तेजी से वायरल हो रहे हैं, जिससे उनकी नई राजनीतिक छवि उभरकर सामने आ रही है.
हालांकि, केरल में उनकी सक्रियता ने एक और राजनीतिक विरोधाभास को उजागर किया है. बिहार में जहां आरजेडी कांग्रेस के साथ गठबंधन में है, वहीं केरल में तेजस्वी कांग्रेस उम्मीदवारों के खिलाफ एलडीएफ के समर्थन में प्रचार कर रहे हैं. विशेष रूप से वायनाड की कालपेट्टा सीट पर यह स्थिति और स्पष्ट होती है, जहां आरजेडी उम्मीदवार का मुकाबला कांग्रेस से है. इस राजनीतिक रणनीति ने कई सवाल खड़े किए हैं. इसी बीच तेजस्वी यादव का एक बयान बिहार की राजनीति में विवाद का कारण बन गया है. उन्होंने केरल में एक कार्यक्रम के दौरान बिहार को देश का सबसे गरीब राज्य बताया और कहा कि बिहार को केरल से शिक्षा और स्वास्थ्य के क्षेत्र में सीखने की जरूरत है. इस बयान को लेकर जेडीयू ने तीखी प्रतिक्रिया दी है और इसे राज्य के लोगों का अपमान बताया है.
जेडीयू प्रदेश अध्यक्ष ने तेजस्वी यादव पर निशाना साधते हुए कहा कि उन्हें अपने माता-पिता के शासनकाल को याद करना चाहिए और बिहार की छवि खराब करने के लिए सार्वजनिक माफी मांगनी चाहिए. जेडीयू का आरोप है कि इस तरह के बयान राज्य की प्रतिष्ठा को नुकसान पहुंचाते हैं और यह राजनीतिक अपरिपक्वता दर्शाते हैं. वहीं, केरल में आरजेडी को एलडीएफ गठबंधन के तहत तीन सीटें मिली हैं, जिन पर पार्टी मजबूती से चुनाव लड़ रही है. तेजस्वी यादव इन सीटों पर अपने उम्मीदवारों के लिए जमकर प्रचार कर रहे हैं. केरल के मुख्यमंत्री ने भी उनके समर्थन और प्रचार के लिए आभार जताया है और इसे धर्मनिरपेक्ष राजनीति को मजबूती देने वाला कदम बताया है.
कुल मिलाकर, तेजस्वी यादव का केरल दौरा न सिर्फ उनकी राजनीतिक सक्रियता को दर्शाता है, बल्कि उनकी बदलती छवि, रणनीति और बयानों के कारण बिहार की राजनीति में भी नई हलचल पैदा कर रहा है.


