सरकारी सिस्टम का ‘ऑफलाइन मूड’! VB-G RAM-G की डिजिटल फाइलें लौटीं, झारखंड में 13 करोड़ से ज्यादा मजदूरी अटकी, देखें VIDEO
योजना बदली, भुगतान का सिस्टम डिजिटल हुआ, लेकिन झारखंड में सरकारी दफ्तरों का पुराना ढर्रा नई व्यवस्था के रास्ते में अड़चन बनता दिख रहा है. VB-G RAM-G के तहत Digital Signature से भेजी जा रही भुगतान फाइलों को ट्रेजरी स्तर से लौटाए जाने की शिकायत है.

Ranchi: झारखंड के गांवों में मजदूरों ने काम किया, हाजिरी दर्ज हुई, काम का Measurement हुआ और भुगतान की प्रक्रिया भी आगे बढ़ी. लेकिन अब मामला ट्रेजरी पर जाकर अटक रहा है. VB-G RAM-G के तहत मजदूरी भुगतान के लिए अपनाई जा रही नई डिजिटल व्यवस्था को लेकर राज्य के कई जिलों में दिक्कत सामने आने की बात कही जा रही है. शिकायत है कि Digital Signature के जरिए भुगतान के लिए भेजी गई फाइलों को कुछ ट्रेजरी से वापस किया जा रहा है. इसका नतीजा यह है कि काम पूरा करने के बाद भी मजदूरों को अपनी मजदूरी का इंतजार करना पड़ रहा है. बताया जा रहा है कि इस वजह से 13 करोड़ रुपये से ज्यादा का भुगतान लंबित है. मामला अब ग्रामीण विकास विभाग और वित्त विभाग के बीच पहुंच गया है. ग्रामीण विकास सचिव ने वित्त सचिव को पत्र लिखकर भुगतान प्रक्रिया को लेकर सभी जिलों में स्पष्ट निर्देश जारी करने की मांग की है.
मनरेगा वाला सिस्टम गया, VB-G RAM-G में पेमेंट का पूरा तरीका बदला
मनरेगा के दौर में मजदूरी भुगतान की प्रक्रिया काफी हद तक कागजी व्यवस्था पर निर्भर थी. पंचायत स्तर पर काम स्वीकृत होने के बाद मजदूर काम करते थे और उनकी हाजिरी मस्टर रोल में दर्ज होती थी. काम पूरा होने के बाद तकनीकी अधिकारी Measurement करते थे. इसके बाद बिल और दूसरी कागजी प्रक्रिया पूरी होती थी. संबंधित अधिकारियों के हस्ताक्षर के बाद फाइल ट्रेजरी तक पहुंचती और भुगतान की प्रक्रिया आगे बढ़ती थी. अब VB-G RAM-G में इसी प्रक्रिया को डिजिटल किया गया है. केंद्र सरकार के मुताबिक नई व्यवस्था 1 जुलाई 2026 से लागू है. इसमें मस्टर रोल बंद होने के बाद Wage List तैयार होती है और फिर Fund Transfer Order यानी FTO जनरेट किया जाता है. इसके बाद Digital Signature के जरिए भुगतान की प्रक्रिया आगे बढ़ती है. यानी कागजी फाइल और मैनुअल सिग्नेचर की जगह ऑनलाइन प्रक्रिया को प्राथमिकता दी गई है.
हाजिरी से FTO तक ऑनलाइन, लेकिन ट्रेजरी पर आकर फंस रही फाइल?
नई व्यवस्था को एक क्रम में समझें तो पहले काम स्वीकृत होता है. फिर मजदूरों की हाजिरी दर्ज होती है. काम पूरा होने के बाद Measurement होता है. इसके आधार पर Wage List तैयार की जाती है और फिर FTO जनरेट होता है. Digital Signature के बाद भुगतान के लिए प्रक्रिया आगे बढ़ती है. समस्या इसी अंतिम चरण के आसपास सामने आने की बात कही जा रही है. जानकारी के मुताबिक कुछ जिलों में Digital Signature के जरिए भेजी गई भुगतान संबंधी फाइलों को ट्रेजरी स्तर से वापस किया जा रहा है. यानी पंचायत और ग्रामीण विकास विभाग की तरफ से नई व्यवस्था के मुताबिक प्रक्रिया पूरी होने के बाद भी भुगतान आगे नहीं बढ़ पा रहा है. झारखंड में वित्त विभाग की अपनी ऑनलाइन व्यवस्था भी है, जिसमें DDO Level Bill Entry यानी e-Bill, e-Treasury और IFMS जैसी सेवाएं शामिल हैं. ऐसे में अब सवाल नई योजना की डिजिटल प्रक्रिया और राज्य की ट्रेजरी व्यवस्था के बीच तालमेल का है.
खूंटी, हजारीबाग और गिरिडीह में प्रक्रिया आगे, दूसरे जिलों में सामने आई अड़चन
जानकारी के मुताबिक खूंटी, हजारीबाग और गिरिडीह में अधिकारी VB-G RAM-G की ऑनलाइन भुगतान व्यवस्था के अनुरूप काम कर रहे हैं. वहीं राज्य के कुछ अन्य जिलों में Digital Signature वाली भुगतान फाइलों को ट्रेजरी स्तर से लौटाए जाने की शिकायत सामने आई है. इसका सीधा असर मजदूरों पर पड़ रहा है. गांव में काम पूरा हो चुका है, हाजिरी और Measurement की प्रक्रिया पूरी हो चुकी है, लेकिन भुगतान की फाइल अगर ट्रेजरी से वापस हो जाती है तो मजदूर के खाते तक पैसा पहुंचने में देरी होगी. यानी समस्या काम होने की नहीं, बल्कि काम के बाद भुगतान को अंतिम चरण तक पहुंचाने की प्रक्रिया की है. अलग-अलग विभागों और सिस्टम के बीच अगर तकनीकी या प्रक्रियागत तालमेल नहीं बनता है, तो डिजिटल व्यवस्था के बावजूद भुगतान अटक सकता है.
13 करोड़ से ज्यादा की मजदूरी लंबित, अब वित्त विभाग से मांगा गया समाधान
इस पूरी स्थिति के बीच ग्रामीण विकास विभाग ने वित्त विभाग का रुख किया है. जानकारी के अनुसार ग्रामीण विकास सचिव ने वित्त सचिव को पत्र भेजकर सभी जिलों को स्पष्ट निर्देश देने की मांग की है, ताकि VB-G RAM-G के तहत Digital Signature से तैयार भुगतान फाइलों को स्वीकार किया जाए और उन्हें वापस न किया जाए. बताया जा रहा है कि इस अड़चन के चलते 13 करोड़ रुपये से ज्यादा का भुगतान लंबित है. ऐसे में मामला सिर्फ तकनीकी प्रक्रिया का नहीं रह गया है. जितने दिन फाइल आगे नहीं बढ़ेगी, उतने दिन मजदूरों को अपनी मजदूरी के लिए इंतजार करना पड़ेगा.
अब विभागों के सामने चुनौती यह है कि नई डिजिटल भुगतान व्यवस्था को ट्रेजरी सिस्टम के साथ बिना किसी टकराव के कैसे लागू किया जाए. क्योंकि योजना का नाम और भुगतान का तरीका बदलने के बाद अगर अंतिम स्तर पर पुरानी और नई प्रक्रियाओं के बीच तालमेल नहीं बनता, तो उसका सबसे सीधा असर उसी मजदूर पर पड़ता है जिसने काम पूरा कर दिया है और जिसे अब सिर्फ अपनी मजदूरी का इंतजार है.


