ईरान संघर्ष पर नई दिल्ली की दो टूक, युद्ध नहीं बातचीत ही समाधान
“ईरान और खाड़ी क्षेत्र में बढ़ते तनाव के बीच भारत ने आधिकारिक तौर पर चिंता जताते हुए सभी पक्षों से संयम बरतने और संवाद के रास्ते पर लौटने की अपील की है. नई दिल्ली ने साफ किया है कि क्षेत्र में जारी संघर्ष न सिर्फ मानवीय संकट को गहरा कर रहा है”

ईरान और खाड़ी क्षेत्र में बढ़ते तनाव के बीच भारत ने आधिकारिक तौर पर चिंता जताते हुए सभी पक्षों से संयम बरतने और संवाद के रास्ते पर लौटने की अपील की है. नई दिल्ली ने साफ किया है कि क्षेत्र में जारी संघर्ष न सिर्फ मानवीय संकट को गहरा कर रहा है, बल्कि आर्थिक और सामरिक स्थिरता पर भी असर डाल रहा है. खासतौर पर रमजान के पवित्र महीने में हालात बिगड़ना और भी चिंताजनक माना जा रहा है. विदेश मंत्रालय के प्रवक्ता रणधीर जायसवाल ने कहा कि भारत हिंसा की जगह कूटनीति को प्राथमिकता देता है और जल्द से जल्द शांति बहाली चाहता है. साथ ही खाड़ी देशों में रह रहे करीब एक करोड़ भारतीयों की सुरक्षा को सर्वोच्च प्राथमिकता बताया गया है.
भारत की अपील: संयम, बातचीत और शांति पर जोर
विदेश मंत्रालय की ओर से जारी बयान में कहा गया कि क्षेत्र में हाल के दिनों में संघर्ष का दायरा बढ़ा है और इसका असर अन्य देशों तक फैलता दिख रहा है. बढ़ती तबाही और आम लोगों की मौतें गंभीर चिंता का विषय हैं. भारत ने सभी पक्षों से आग्रह किया है कि वे तनाव कम करने के लिए ठोस कदम उठाएं और बातचीत के माध्यम से समाधान तलाशें. रणधीर जायसवाल ने स्पष्ट किया कि भारत का रुख हमेशा से कूटनीतिक समाधान के पक्ष में रहा है. उनका कहना था कि संघर्ष का विस्तार क्षेत्रीय और वैश्विक स्थिरता के लिए नुकसानदेह हो सकता है, इसलिए जल्द युद्धविराम और संवाद जरूरी है.
खाड़ी में भारतीयों की सुरक्षा सबसे बड़ी प्राथमिकता
खाड़ी क्षेत्र में बड़ी संख्या में भारतीय नागरिक काम करते और रहते हैं. विदेश मंत्रालय ने दोहराया कि उनकी सुरक्षा और भलाई सरकार की सर्वोच्च चिंता है. हालिया हमलों और अस्थिरता के कारण कुछ भारतीयों के प्रभावित होने की खबरें भी सामने आई हैं, जिसने चिंता और बढ़ा दी है. सरकार ने बताया कि प्रभावित देशों में भारतीय दूतावास और वाणिज्यिक दूतावास लगातार समुदाय के संपर्क में हैं. समय-समय पर एडवाइजरी जारी की जा रही है और जरूरत पड़ने पर हर संभव सहायता उपलब्ध कराई जा रही है. सरकार हालात पर करीबी नजर बनाए हुए है.
व्यापार, ऊर्जा और शिपिंग पर असर की आशंका
भारत ने स्पष्ट किया कि खाड़ी क्षेत्र से होकर देश की महत्वपूर्ण व्यापार और ऊर्जा आपूर्ति श्रृंखला गुजरती है. यदि क्षेत्र में अस्थिरता बढ़ती है तो इसका सीधा असर भारतीय अर्थव्यवस्था पर पड़ सकता है. विदेश मंत्रालय ने मर्चेंट शिपिंग पर हमलों की निंदा करते हुए कहा कि समुद्री मार्गों की सुरक्षा बेहद अहम है. जहाजों पर हमले न सिर्फ वैश्विक व्यापार को प्रभावित करते हैं, बल्कि भारतीय नागरिकों और कंपनियों के हितों पर भी प्रतिकूल प्रभाव डालते हैं. भारत ने समुद्री सुरक्षा सुनिश्चित करने की आवश्यकता पर बल दिया है.
कूटनीतिक संपर्क और आगे की रणनीति
सरकार ने बताया कि भारत इस मुद्दे पर संबंधित देशों और प्रमुख वैश्विक साझेदारों के संपर्क में है. प्रधानमंत्री और विदेश मंत्री स्तर पर भी बातचीत हुई है, ताकि तनाव कम करने की दिशा में सकारात्मक पहल हो सके. विदेश मंत्रालय के अनुसार, बदलते हालात के मद्देनजर सरकार लगातार समीक्षा कर रही है और राष्ट्रीय हितों की रक्षा के लिए आवश्यक कदम उठाए जाएंगे. भारत ने दोहराया कि क्षेत्रीय शांति और स्थिरता सभी देशों के हित में है और हिंसा की जगह संवाद ही स्थायी समाधान का मार्ग है.



