सऊदी में फिर अटकी महेंद्र महतो की वापसी, परिवार ने सरकार से लगाई गुहार
“गिरिडीह के बगोदर निवासी प्रवासी मजदूर महेंद्र महतो नवंबर 2025 से सऊदी अरब में फंसे हैं और अब तक उनकी वतन वापसी नहीं हो सकी है. परिवार ने केंद्र सरकार, विदेश मंत्रालय और भारतीय दूतावास से हस्तक्षेप की मांग की है. नौकरी, बकाया वेतन और कानूनी प्रक्रिया के कारण उनकी वापसी अटकी हुई बताई जा रही है.”

Giridih: गिरिडीह जिले के बगोदर थाना क्षेत्र के खेतको निवासी प्रवासी मजदूर महेंद्र महतो की सऊदी अरब से अब तक वतन वापसी नहीं हो सकी है. परिवार एक बार फिर केंद्र सरकार, विदेश मंत्रालय और रियाद स्थित भारतीय दूतावास से हस्तक्षेप की गुहार लगा रहा है. महेंद्र नवंबर 2025 से सऊदी अरब में फंसे हैं. जुलाई में भी उनकी परेशानी को लेकर रिपोर्ट सामने आई थी और अगस्त में परिवार ने फिर सुरक्षित वापसी की मांग की थी. परिजनों के अनुसार रोजगार की तलाश में सऊदी पहुंचे महेंद्र को एयरपोर्ट पर दवा से जुड़े एक मामले में हिरासत में लिया गया था. बाद में जांच के बाद उन्हें छोड़ दिया गया. परिवार का कहना है कि इसके बाद उन्होंने करीब चार महीने कंपनी में काम किया, लेकिन बाद में नौकरी से हटा दिया गया और बकाया वेतन भी नहीं मिला. अब कानूनी प्रक्रिया के कारण उनकी वापसी अटकी हुई है.
तीन महीनों में कई मामले आए सामने, कोई लौटा तो किसी का शव
जुलाई से सितंबर के बीच झारखंड के कई प्रवासी मजदूरों की विदेश से वापसी से जुड़े मामले सामने आए. अगस्त में ओमान में फंसी सिमडेगा की प्रीति कुजूर की करीब पांच महीने बाद सुरक्षित वापसी हुई. सितंबर में दुबई में फंसे बगोदर के रामेश्वर दास की वापसी भी हुई. वह करीब चार महीने दुबई में फंसे रहे थे. इसी अवधि में सऊदी अरब में सड़क हादसे में जान गंवाने वाले बोकारो के सत्येंद्र महतो का शव 29 जुलाई को गांव पहुंचा. रिपोर्ट के मुताबिक उनकी मौत 25 जून को हुई थी और करीब एक महीने बाद शव भारत आया.
दूसरी ओर जून में गिरिडीह के द्वारिका महतो की सऊदी में मौत के बाद शव कई दिनों तक वहीं पड़ा रहा था. जुलाई में गिरिडीह के द्वारिका महतो और बोकारो के सत्येंद्र महतो के शव सऊदी में होने की जानकारी दी गई थी. इन घटनाओं के बीच महेंद्र महतो का मामला फिर सामने आना बताता है कि विदेश में फंसे मजदूरों की सुरक्षित वापसी और कानूनी मामलों के निपटारे की चुनौती अभी बनी हुई है. समाजसेवी सिकंदर अली ने सरकार से ऐसे मामलों में दूतावास और संबंधित विभागों के जरिए तत्काल सहायता उपलब्ध कराने की मांग की है.

