24 घंटे में माफी के अल्टीमेटम पर जयराम महतो का जवाब- फांसी मंजूर, माफी नहीं
धनबाद में थाना प्रभारी से कथित गाली-गलौज के मामले में जयराम महतो और पुलिस एसोसिएशन के बीच विवाद बढ़ गया है. 24 घंटे में माफी मांगने के अल्टीमेटम पर विधायक ने दो टूक कहा- फांसी पर चढ़ जाएंगे, लेकिन माफी नहीं मांगेंगे.

Ranchi: धनबाद में विधायक जयराम महतो और पुलिस एसोसिएशन के बीच विवाद लगातार तूल पकड़ता जा रहा है. बरवाअड्डा थाना प्रभारी रवि कुमार से कथित तौर पर अमर्यादित भाषा में बातचीत और गाली-गलौज के आरोपों के बाद पुलिस संगठनों ने विधायक के खिलाफ मोर्चा खोल दिया है. मंगलवार को पुलिस एसोसिएशन ने प्रेस वार्ता कर 24 घंटे के भीतर जयराम महतो से माफी मांगने की मांग की. वहीं, विधायक ने इस अल्टीमेटम को सिरे से खारिज करते हुए कहा कि वह फांसी पर चढ़ जाएंगे, लेकिन माफी नहीं मांगेंगे. उन्होंने पुलिस संगठन की प्रेस वार्ता के तरीके पर भी सवाल उठाते हुए कथित भेदभाव का आरोप लगाया है.
अल्टीमेटम पर जयराम महतो का करारा जवाब
पुलिस एसोसिएशन की ओर से 24 घंटे के भीतर माफी मांगने के अल्टीमेटम के बाद डुमरी विधायक जयराम महतो ने अपना रुख स्पष्ट कर दिया है. उन्होंने कहा कि वह किसी भी दबाव में माफी मांगने वाले नहीं हैं. विधायक ने यहां तक कहा कि फांसी पर चढ़ जाएंगे, लेकिन माफी नहीं मांगेंगे. जयराम महतो ने पुलिस संगठन की ओर से की गई प्रेस वार्ता के तरीके पर भी सवाल खड़े किए. उनका कहना है कि किसी जनप्रतिनिधि के खिलाफ इस तरह सार्वजनिक रूप से बयान देना उचित नहीं है. विधायक ने पुलिस संगठन की कार्रवाई को लेकर कथित नस्लीय भेदभाव का आरोप भी लगाया. उन्होंने स्पष्ट किया कि वह अपने बयान और रुख पर कायम हैं तथा पुलिस एसोसिएशन के दबाव में पीछे हटने का उनका कोई इरादा नहीं है.
थाना प्रभारी से कथित गाली-गलौज का मामला
पूरा विवाद धनबाद के बरवाअड्डा थाना प्रभारी रवि कुमार से कथित तौर पर गाली-गलौज और अमर्यादित भाषा के इस्तेमाल से जुड़ा है. जानकारी के अनुसार, दो दिन पहले विधायक जयराम महतो ने थाना प्रभारी को फोन किया था. बातचीत के दौरान कथित रूप से अभद्र भाषा का प्रयोग किए जाने और धमकी देने का आरोप है. इस मामले में बरवाअड्डा थाना प्रभारी के बयान पर प्राथमिकी दर्ज कर ली गई है. पुलिस अब मामले की जांच और आगे की कानूनी कार्रवाई में जुटी है. इस बीच कथित फोन बातचीत का ऑडियो भी वायरल होने की बात सामने आई है. हालांकि, वायरल ऑडियो की स्वतंत्र पुष्टि नहीं हुई है. मामला सामने आने के बाद पुलिस महकमे में नाराजगी बढ़ी और पुलिस संगठनों ने विधायक के खिलाफ कार्रवाई की मांग तेज कर दी.
पुलिस संगठनों ने खोला मोर्चा
थाना प्रभारी के साथ कथित दुर्व्यवहार को लेकर धनबाद पुलिस एसोसिएशन के साथ पुलिस मेंस एसोसिएशन भी विधायक जयराम महतो के खिलाफ मुखर हो गया है. पुलिस पदाधिकारियों और कर्मियों ने विरोध जताते हुए काम करने से इनकार करने की बात कही है. धनबाद पुलिस लाइन में पुलिसकर्मियों को समझाने और स्थिति को नियंत्रित करने की कोशिश की जा रही है. पुलिस संगठनों का आरोप है कि जवान और अधिकारी नेताओं की सुरक्षा में लगातार तैनात रहते हैं, लेकिन उन्हीं के साथ कथित तौर पर अपमानजनक व्यवहार किया जाता है. एसोसिएशन ने सरकार से विधायक के खिलाफ कड़ी कार्रवाई की मांग की है. पुलिस पदाधिकारियों ने यहां तक मांग रखी है कि कथित तौर पर अमर्यादित व्यवहार करने वाले विधायक की सदस्यता समाप्त की जाए. इस मांग के बाद राजनीतिक और प्रशासनिक स्तर पर भी विवाद बढ़ने की संभावना है.
सरकार से विधायक की सदस्यता खत्म करने की मांग
पुलिस संगठनों ने जयराम महतो के खिलाफ कार्रवाई की मांग को और आगे बढ़ाते हुए सरकार से उनकी विधानसभा सदस्यता समाप्त करने की मांग की है. पुलिस पदाधिकारियों का कहना है कि जनप्रतिनिधियों के लिए भी पुलिस अधिकारियों और जवानों के प्रति मर्यादित भाषा का इस्तेमाल करना जरूरी है. उनका आरोप है कि पुलिसकर्मी दिन-रात नेताओं की सुरक्षा में तैनात रहते हैं, लेकिन बदले में यदि उन्हीं के साथ कथित तौर पर गाली-गलौज की जाए तो यह स्वीकार्य नहीं हो सकता. इसी आधार पर पुलिस संगठनों ने सरकार से विधायक के खिलाफ कड़ा कदम उठाने की मांग की है. हालांकि, किसी विधायक की सदस्यता समाप्त करने का सवाल संवैधानिक और कानूनी प्रक्रिया से जुड़ा होता है. ऐसे में पुलिस संगठनों की मांग पर सरकार और संबंधित संस्थाओं का रुख महत्वपूर्ण होगा.
अब आगे क्या होगा?
जयराम महतो द्वारा माफी मांगने से इनकार करने और पुलिस संगठनों के कड़े रुख के बाद विवाद के जल्द खत्म होने के संकेत फिलहाल नहीं दिख रहे हैं. एक तरफ पुलिस ने थाना प्रभारी के बयान पर प्राथमिकी दर्ज कर ली है, वहीं दूसरी तरफ पुलिस एसोसिएशन और मेंस एसोसिएशन लगातार विधायक के खिलाफ कार्रवाई की मांग कर रहे हैं. दूसरी ओर जयराम महतो ने स्पष्ट कर दिया है कि वह अपने रुख से पीछे नहीं हटेंगे. ऐसे में अब पूरे मामले में पुलिस की जांच और कानूनी प्रक्रिया महत्वपूर्ण होगी. वायरल ऑडियो, प्राथमिकी में लगाए गए आरोप और संबंधित पक्षों के बयान जांच का हिस्सा बन सकते हैं. आने वाले दिनों में यह भी देखना होगा कि सरकार और विधानसभा स्तर पर इस मामले को लेकर क्या कदम उठाए जाते हैं और क्या दोनों पक्षों के बीच विवाद को बातचीत के जरिए सुलझाने की कोई पहल होती है.

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