झारखंड स्टेट फार्मेसी काउंसिल में कथित भ्रष्टाचार की जांच की मांग, बाबूलाल मरांडी ने CM हेमंत सोरेन को लिखा पत्र
झारखंड स्टेट फार्मेसी काउंसिल में कथित भ्रष्टाचार को लेकर बाबूलाल मरांडी ने CM हेमंत सोरेन को पत्र लिखा है. उन्होंने CBI या हाईकोर्ट की निगरानी में जांच की मांग की.

Ranchi: झारखंड विधानसभा में नेता प्रतिपक्ष बाबूलाल मरांडी ने झारखंड स्टेट फार्मेसी काउंसिल में कथित भ्रष्टाचार और अनियमितताओं की स्वतंत्र जांच कराने की मांग की है. उन्होंने मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन को पत्र लिखकर पूरे मामले की CBI अथवा झारखंड हाईकोर्ट के वर्तमान न्यायाधीश की निगरानी में जांच कराने का आग्रह किया है. मरांडी ने पिछले 10 वर्षों में फार्मेसी संस्थानों को जारी किए गए NOC, मान्यता, सीट आवंटन और डिग्रियों का व्यापक ऑडिट कराने की मांग भी की है. उन्होंने आरोप लगाया कि राज्य में फार्मेसी कॉलेजों की संख्या करीब एक दशक में 3 से बढ़कर लगभग 150 हो गई और कई संस्थानों को जरूरी मानकों के बिना मंजूरी दिए जाने के आरोप हैं. उनके मुताबिक मामले की निष्पक्ष जांच जरूरी है, ताकि दोषियों की जवाबदेही तय होने के साथ विद्यार्थियों के हितों की रक्षा हो सके.
10 साल में 3 से बढ़कर करीब 150 हुए फार्मेसी कॉलेज, उठाए सवाल
बाबूलाल मरांडी ने मुख्यमंत्री को लिखे पत्र में कहा है कि पिछले करीब एक दशक में झारखंड में फार्मेसी कॉलेजों की संख्या 3 से बढ़कर लगभग 150 हो गई. उन्होंने आरोप लगाया कि इस दौरान कई संस्थानों को आवश्यक मानकों और संसाधनों की उपलब्धता के बिना NOC और अन्य मंजूरियां दिए जाने की शिकायतें सामने आई हैं. मरांडी ने पत्र में प्रति कॉलेज करीब 30 लाख रुपये तक की कथित अवैध वसूली और पूरे मामले में करीब 800 करोड़ रुपये के कथित सिंडिकेट की बात कही है. हालांकि ये आरोप हैं और इनकी स्वतंत्र जांच से ही इनकी वास्तविकता स्पष्ट हो सकेगी. उन्होंने यह भी सवाल उठाया कि यदि इतने बड़े स्तर पर वर्षों तक अनियमितताएं होती रहीं, तो संबंधित विभाग, मंत्री, अधिकारी और काउंसिल के पदाधिकारी इससे कैसे अनजान रहे.
NOC, मान्यता से लेकर डिग्रियों तक ऑडिट की मांग
नेता प्रतिपक्ष ने मुख्यमंत्री से पिछले 10 वर्षों में फार्मेसी संस्थानों को जारी किए गए सभी NOC, मान्यताओं, सीट आवंटन और डिग्रियों का व्यापक ऑडिट कराने की मांग की है. उन्होंने कहा कि कई कॉलेजों की मान्यता बाद में रद्द होने की घटनाएं भी पूरे मामले को गंभीर बनाती हैं. ऐसे में यह जांच जरूरी है कि संस्थानों को शुरुआती स्तर पर मंजूरी देते समय निर्धारित मानकों का पालन किया गया था या नहीं. मरांडी ने जांच के दायरे में संबंधित मंत्री, विभागीय अधिकारियों, झारखंड स्टेट फार्मेसी काउंसिल के पदाधिकारियों और कथित बिचौलियों की भूमिका को भी शामिल करने की मांग की है. उनका कहना है कि जांच में NOC जारी करने से लेकर मान्यता, सीट आवंटन और परीक्षा संचालन तक की पूरी प्रक्रिया की पड़ताल होनी चाहिए.
CBI या हाईकोर्ट के वर्तमान न्यायाधीश की निगरानी में जांच की मांग
बाबूलाल मरांडी ने मुख्यमंत्री से पूरे प्रकरण की CBI जांच कराने या झारखंड हाईकोर्ट के वर्तमान न्यायाधीश की निगरानी में स्वतंत्र जांच कराने का आग्रह किया है. उन्होंने कहा कि मामला केवल कथित भ्रष्टाचार तक सीमित नहीं है, बल्कि इससे फार्मेसी की पढ़ाई कर रहे हजारों विद्यार्थियों के भविष्य पर भी असर पड़ सकता है. यदि बिना पर्याप्त संसाधनों और निर्धारित मानकों के संस्थानों को मंजूरी मिली है, तो इससे स्वास्थ्य क्षेत्र में प्रशिक्षित होने वाले पेशेवरों की गुणवत्ता पर भी सवाल खड़े होते हैं. मरांडी ने कहा कि जांच के बाद जो भी व्यक्ति दोषी पाया जाए, उसके खिलाफ कार्रवाई होनी चाहिए, चाहे वह कितना भी प्रभावशाली क्यों न हो. साथ ही उन्होंने निर्दोष विद्यार्थियों के हितों की रक्षा के लिए आवश्यक कदम उठाने की मांग की है.

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