‘वंदे मातरम्’ पर कांग्रेस का फैसला, BJP ने 10 पॉइंट के प्रस्ताव से खोली मोर्चे की पूरी किताब
‘वंदे मातरम्’ के शुरुआती दो पद ही गाने के कांग्रेस के फैसले पर बीजेपी ने 10 सूत्रीय निंदा प्रस्ताव पारित किया है. बीजेपी ने इसे राष्ट्रगीत के सम्मान और राष्ट्रीय भावना से जुड़ा मुद्दा बताते हुए देशभर में अभियान चलाने की बात कही है.


New Delhi: ‘वंदे मातरम्’ को लेकर बीजेपी और कांग्रेस के बीच सियासी टकराव और तेज हो गया है. कांग्रेस कार्यसमिति के उस फैसले पर बीजेपी ने कड़ा एतराज जताया है, जिसमें पार्टी के कार्यक्रमों में राष्ट्रगीत के शुरुआती दो पद ही गाने की बात कही गई है. 19 अगस्त को CWC की बैठक में कांग्रेस ने 1937 के अपने पुराने प्रस्ताव का हवाला देते हुए इस परंपरा को जारी रखने का फैसला किया था. अब बीजेपी ने नई दिल्ली में राष्ट्रीय अध्यक्ष नितिन नवीन की अध्यक्षता में हुई नई राष्ट्रीय टीम की पहली बैठक में कांग्रेस के फैसले के खिलाफ 10 सूत्रीय निंदा प्रस्ताव पारित किया है. बीजेपी ने इसे राष्ट्रगीत और राष्ट्रीय स्वाभिमान से जोड़ते हुए देशभर में अभियान चलाने का ऐलान किया है.
दो अंतरे बनाम पूरा राष्ट्रगीत, यहीं से शुरू हुआ नया विवाद
कांग्रेस कार्यसमिति ने अपने कार्यक्रमों में ‘वंदे मातरम्’ के केवल शुरुआती दो पद गाने का फैसला किया है. कांग्रेस का कहना है कि वह 1937 में तय की गई उसी व्यवस्था का पालन कर रही है. पार्टी के मुताबिक, उस समय महात्मा गांधी, जवाहरलाल नेहरू और सरदार पटेल समेत प्रमुख नेताओं की सहमति से यह व्यवस्था बनी थी. कांग्रेस का तर्क है कि यह फैसला ऐतिहासिक परंपरा और सभी समुदायों की भावनाओं को ध्यान में रखकर लिया गया था.
BJP का 10 सूत्रीय प्रस्ताव, देशभर में अभियान की तैयारी
बीजेपी की राष्ट्रीय टीम की पहली बैठक में कांग्रेस के फैसले के खिलाफ 10 बिंदुओं वाला प्रस्ताव पारित किया गया. बीजेपी ने कहा कि ‘वंदे मातरम्’ के सम्मान और उसकी ऐतिहासिक विरासत से किसी भी तरह का समझौता स्वीकार नहीं किया जाएगा. पार्टी ने इसे सिर्फ राजनीतिक विवाद नहीं, बल्कि राष्ट्रीय स्वाभिमान से जुड़ा विषय बताया है. बीजेपी अब इस मुद्दे को देशभर में जनसंपर्क और राजनीतिक कार्यक्रमों के जरिए उठाने की तैयारी में है.
नितिन नवीन बोले- राष्ट्रगीत के सम्मान से समझौता नहीं
बीजेपी अध्यक्ष नितिन नवीन ने कांग्रेस के फैसले पर तीखी प्रतिक्रिया दी है. उन्होंने आरोप लगाया कि कांग्रेस ने राजनीतिक हितों और तुष्टीकरण की राजनीति के चलते ‘वंदे मातरम्’ को सीमित करने का फैसला लिया है. बीजेपी की बैठक में महात्मा गांधी के उस कथन का भी उल्लेख किया गया, जिसमें उन्होंने ‘वंदे मातरम्’ को स्वतंत्रता आंदोलन और राष्ट्रीय भावना से जुड़ा महत्वपूर्ण उद्घोष बताया था. पार्टी का कहना है कि अभियान के जरिए राष्ट्रगीत के इतिहास, महत्व और विरासत को लोगों तक पहुंचाया जाएगा.
अब ‘वंदे मातरम्’ पर कानून भी सख्त, तीन साल तक की सजा का प्रावधान
‘वंदे मातरम्’ को लेकर यह बहस ऐसे समय तेज हुई है, जब संसद ने राष्ट्रीय सम्मान से जुड़े कानून में संशोधन को मंजूरी दी है. राज्यसभा ने 29 जुलाई को और लोकसभा ने 30 जुलाई को संबंधित विधेयक पारित किया. नए प्रावधानों के तहत ‘वंदे मातरम्’ को राष्ट्रगान ‘जन गण मन’ के समान कानूनी संरक्षण देने का प्रावधान किया गया है. जानबूझकर राष्ट्रगीत के गायन में बाधा डालने या उसके सार्वजनिक अपमान पर तीन साल तक की जेल, जुर्माना या दोनों का प्रावधान बताया गया है.
1937 के फैसले से 2026 के सियासी घमासान तक पहुंचा मामला
‘वंदे मातरम्’ पर कांग्रेस का मौजूदा फैसला करीब नौ दशक पुराने राजनीतिक इतिहास से जुड़ा है. कांग्रेस का कहना है कि 1937 में पार्टी की कार्यसमिति ने गीत के इस्तेमाल को लेकर जो व्यवस्था बनाई थी, उसी का पालन आज भी किया जा रहा है. बीजेपी इस फैसले को मौजूदा समय में राष्ट्रगीत के सम्मान के सवाल से जोड़ रही है. ऐसे में एक ऐतिहासिक प्रस्ताव अब 2026 की राजनीति में नए विवाद का केंद्र बन गया है.
बीजेपी के 10 सूत्रीय प्रस्ताव के बाद साफ है कि ‘वंदे मातरम्’ का मुद्दा आने वाले दिनों में और गरमाने वाला है. कांग्रेस अपने पुराने फैसले को ऐतिहासिक परंपरा बता रही है, जबकि बीजेपी इसे राष्ट्रीय सम्मान का सवाल बनाकर देशव्यापी अभियान की तैयारी में जुट गई है.

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