झारखंडी भाषाओं को बचाने की मुहिम तेज, भाषा बचाओ मंच ने बताई आगे की रणनीति
“झारखंड की जनजातीय एवं क्षेत्रीय भाषाओं के संरक्षण और संवर्धन को लेकर भाषा बचाओ मंच ने प्रेस वार्ता कर अभियान की जानकारी दी. मंच के अनुसार, 4 जुलाई 2026 से शुरू हुए अभियान के तहत महासम्मेलन और भाषा संवाद का आयोजन किया जा चुका है.”

Ranchi: झारखंड की जनजातीय और क्षेत्रीय भाषाओं के संरक्षण एवं संवर्धन को लेकर जनजातीय एवं क्षेत्रीय भाषा बचाओ मंच ने प्रेस वार्ता आयोजित की. मंच ने पिछले दो महीनों से चलाए जा रहे भाषा संरक्षण अभियान और आगामी कार्यक्रमों की जानकारी साझा की. प्रतिनिधियों ने बताया कि अभियान की शुरुआत 4 जुलाई 2026 को रांची विश्वविद्यालय के शांति मंडप में आयोजित महासम्मेलन से हुई थी. इसके बाद 21 जुलाई को भाषा संवाद का आयोजन किया गया. मंच ने बताया कि 29 सितंबर को प्रस्तावित भाषा यात्रा को हाल की दुखद घटनाओं और शोकाकुल वातावरण के कारण स्थगित कर दिया गया है. अब यह यात्रा अक्टूबर में आयोजित करने का निर्णय लिया गया है.
महासम्मेलन से शुरू हुआ भाषा संरक्षण अभियान
मंच के प्रतिनिधियों ने प्रेस वार्ता में बताया कि झारखंडी भाषाओं के संरक्षण और संवर्धन के उद्देश्य से अभियान की औपचारिक शुरुआत 4 जुलाई 2026 को रांची विश्वविद्यालय के शांति मंडप में आयोजित महासम्मेलन से हुई थी. मंच के अनुसार, इस सम्मेलन में भाषा कर्मियों, सांस्कृतिक कर्मियों, बुद्धिजीवियों, छात्रों, शोधार्थियों और भाषा प्रेमियों समेत पांच हजार से अधिक लोगों ने भाग लिया था. सम्मेलन में झारखंड की जनजातीय एवं क्षेत्रीय भाषाओं को संरक्षित करने की आवश्यकता पर चर्चा की गई. मंच ने कहा कि भाषा केवल संवाद का माध्यम नहीं, बल्कि किसी समाज की संस्कृति, परंपरा और पहचान से भी जुड़ी होती है. इसी उद्देश्य से अभियान को आगे बढ़ाया जा रहा है. इसके बाद 21 जुलाई 2026 को जनजातीय एवं क्षेत्रीय भाषा शोध संस्थान में भाषा संवाद का आयोजन किया गया. इसमें भाषाविदों, शिक्षकों, शोधार्थियों, विद्यार्थियों और भाषा कर्मियों ने हिस्सा लेकर भाषा संरक्षण से जुड़े मुद्दों पर चर्चा की.
अक्टूबर में निकाली जाएगी भाषा यात्रा
मंच ने बताया कि भाषा आंदोलन को आगे बढ़ाने और अपनी मांगों को सरकार तक पहुंचाने के उद्देश्य से 29 सितंबर को रांची के बरियातू से मेन रोड होते हुए भाषा यात्रा निकालने की योजना बनाई गई थी. हालांकि, हाल में हुई दुखद घटनाओं और शोकाकुल वातावरण को देखते हुए प्रस्तावित यात्रा को स्थगित करने का निर्णय लिया गया. अब मंच ने इस यात्रा को अक्टूबर महीने में आयोजित करने का फैसला किया है. प्रेस वार्ता के माध्यम से मंच ने झारखंड की भाषाओं, संस्कृति और पहचान से जुड़े लोगों को आगामी कार्यक्रम की जानकारी दी. मंच के प्रतिनिधियों ने कहा कि भाषा संरक्षण का अभियान आगे भी जारी रहेगा और इससे जुड़े मुद्दों को व्यापक स्तर पर उठाया जाएगा. प्रेस वार्ता में डॉ. बिल्लावन महतो, डॉ. फारिक अहमद और मंच के संयोजक पप्पू कुमार समेत विभिन्न जनजातीय एवं क्षेत्रीय भाषाओं के प्रतिनिधि, संयोजक और शोधार्थी मौजूद रहे. मंच ने लोगों से भाषा संरक्षण के प्रयासों से जुड़ने की अपील भी की.

