"कैमरे के एंगल से नहीं चलेगा काम, प्रधानमंत्री को दिल बदलना होगा", लोकसभा में बोलीं प्रियंका गांधी
लोकसभा में एंटी पेपर लीक संशोधन विधेयक पर चर्चा के दौरान प्रियंका गांधी ने केंद्र सरकार पर तीखा हमला बोला. उन्होंने छात्रों के भविष्य, पुलिस कार्रवाई और जवाबदेही का मुद्दा उठाते हुए कहा कि प्रधानमंत्री को "कैमरे का नहीं, दिल का एंगल बदलना पड़ेगा।.


New Delhi: संसद के मानसून सत्र में मंगलवार को लोकसभा में एंटी पेपर लीक संशोधन विधेयक पर जोरदार बहस जारी रही. चर्चा के दौरान कांग्रेस सांसद प्रियंका गांधी ने केंद्र सरकार पर तीखा हमला बोलते हुए कहा कि प्रधानमंत्री को "कैमरे का नहीं, दिल का एंगल बदलना पड़ेगा." उन्होंने आरोप लगाया कि देश का युवा सिर्फ नए कानून नहीं, बल्कि जवाबदेही और भरोसा चाहता है. प्रियंका गांधी ने छात्रों के आंदोलन, पुलिस कार्रवाई और पेपर लीक मामलों में अब तक दोषियों को सजा नहीं मिलने का मुद्दा उठाते हुए सरकार से कई सवाल पूछे. दूसरी ओर सरकार ने संशोधन विधेयक को परीक्षा प्रणाली में पारदर्शिता और त्वरित न्याय सुनिश्चित करने वाला बड़ा कदम बताया. सत्ता पक्ष और विपक्ष के बीच आरोप-प्रत्यारोप के बीच सदन में कई बार हंगामे की स्थिति भी बनी, लेकिन पेपर लीक जैसे गंभीर मुद्दे पर विस्तृत चर्चा लगातार जारी रही.
पेपर लीक बिल पर लंबी बहस, चर्चा के लिए बढ़ाया गया समय
लोकसभा में एंटी पेपर लीक संशोधन विधेयक पर दोपहर से चर्चा शुरू हुई. शुरुआत में इस पर सीमित समय तय किया गया था, लेकिन विपक्ष ने अधिक समय की मांग की. इसके बाद सरकार ने भी विस्तृत चर्चा पर सहमति जताई और सदन में सभी दलों को अपनी बात रखने का अवसर देने का फैसला हुआ. बहस के दौरान अलग-अलग राजनीतिक दलों के सांसदों ने परीक्षा प्रणाली, छात्रों के भविष्य और पेपर लीक की घटनाओं पर अपने-अपने तर्क रखे.
प्रियंका गांधी ने सरकार से मांगी जवाबदेही
चर्चा में हिस्सा लेते हुए प्रियंका गांधी ने कहा कि केवल कानून में संशोधन कर देने से समस्या खत्म नहीं होगी. उन्होंने आरोप लगाया कि पेपर लीक मामलों में अब तक किसी बड़े आरोपी को सजा नहीं मिली है. उनका कहना था कि युवाओं का भरोसा तभी लौटेगा, जब सरकार जिम्मेदारी तय करेगी और दोषियों के खिलाफ प्रभावी कार्रवाई होगी. उन्होंने यह भी कहा कि नई समितियां बनाने से ज्यादा जरूरत व्यवस्था में वास्तविक सुधार लाने की है. अपने भाषण में उन्होंने प्रधानमंत्री पर निशाना साधते हुए कहा कि देश के युवाओं की भावनाओं को समझने के लिए "कैमरे का नहीं, दिल का एंगल बदलना पड़ेगा."
छात्र आंदोलन और पुलिस कार्रवाई का मुद्दा भी उठा
प्रियंका गांधी ने हाल के छात्र आंदोलनों का जिक्र करते हुए पुलिस कार्रवाई पर सवाल उठाए. उन्होंने कहा कि प्रदर्शन कर रहे छात्रों के साथ जिस तरह का व्यवहार हुआ, उससे कई गंभीर सवाल खड़े हुए हैं. उन्होंने सरकार से पूछा कि छात्रों पर बल प्रयोग की जरूरत क्यों पड़ी और इस पूरे घटनाक्रम की जिम्मेदारी कौन लेगा. कांग्रेस सहित कई विपक्षी सांसदों ने भी छात्रों की सुरक्षा और उनकी आवाज सुने जाने की मांग दोहराई.
सरकार बोली- कानून को और मजबूत बनाया जा रहा है
सरकार की ओर से केंद्रीय मंत्री डॉ. जितेंद्र सिंह ने संशोधन विधेयक का पक्ष रखा. उन्होंने कहा कि सरकार परीक्षा प्रणाली को अधिक सुरक्षित और पारदर्शी बनाने के लिए प्रतिबद्ध है. उनके अनुसार संशोधन के जरिए जांच प्रक्रिया को समयबद्ध बनाने, विशेष फास्ट ट्रैक कोर्ट की व्यवस्था करने और दोषियों के खिलाफ जल्द कार्रवाई सुनिश्चित करने का प्रावधान किया गया है. सरकार का कहना है कि इसका उद्देश्य ईमानदार छात्रों के भविष्य की रक्षा करना है.
भाजपा सांसदों ने विपक्ष के आरोपों का किया जवाब
भाजपा सांसद बांसुरी स्वराज, तेजस्वी सूर्या और श्रीकांत शिंदे ने बहस के दौरान विपक्ष के आरोपों का जवाब दिया. उनका कहना था कि पेपर लीक की घटनाएं पहले भी होती रही हैं और वर्तमान सरकार ने पहली बार इसे रोकने के लिए व्यापक कानूनी और प्रशासनिक सुधारों की दिशा में कदम उठाए हैं. भाजपा सांसदों ने नई शिक्षा नीति, परीक्षा सुधार और संस्थागत बदलावों का भी उल्लेख करते हुए कहा कि सरकार केवल कानून नहीं, पूरी परीक्षा व्यवस्था में सुधार पर काम कर रही है.
एनटीए, शिक्षा व्यवस्था और परीक्षा मॉडल पर भी हुई चर्चा
बहस केवल संशोधन विधेयक तक सीमित नहीं रही. कई सांसदों ने राष्ट्रीय परीक्षा एजेंसी (एनटीए) की कार्यप्रणाली, परीक्षा प्रबंधन, कोचिंग संस्कृति और छात्रों पर बढ़ते मानसिक दबाव का मुद्दा भी उठाया. कुछ सदस्यों ने सुझाव दिया कि छात्रों को एक ही परीक्षा पर निर्भर नहीं रहना चाहिए और मूल्यांकन की ऐसी व्यवस्था विकसित होनी चाहिए, जिससे एक दिन की परीक्षा पूरे भविष्य का फैसला न करे. शिक्षा प्रणाली में संरचनात्मक बदलाव की जरूरत पर भी कई सांसदों ने जोर दिया.
सदन में कई बार हुआ हंगामा
प्रियंका गांधी के भाषण के दौरान कुछ टिप्पणियों को लेकर सत्ता पक्ष ने कड़ी आपत्ति जताई. केंद्रीय मंत्री किरेन रिजिजू और अन्य भाजपा सांसदों ने उनके कुछ बयानों को रिकॉर्ड से हटाने की मांग की. इस दौरान सदन में शोर-शराबा भी हुआ और स्पीकर को कई बार हस्तक्षेप करना पड़ा. विपक्ष ने भी सरकार पर जवाब देने से बचने का आरोप लगाया. हालांकि हंगामे के बीच भी विधेयक पर चर्चा जारी रही.
अब बहस के बाद सरकार और विपक्ष की अगली परीक्षा
एंटी पेपर लीक संशोधन विधेयक पर जारी बहस ने साफ कर दिया कि परीक्षा प्रणाली, पारदर्शिता और छात्रों का भरोसा अब राष्ट्रीय राजनीति का बड़ा मुद्दा बन चुका है. सरकार इसे परीक्षा माफिया के खिलाफ सख्त कार्रवाई की दिशा में अहम कदम बता रही है, जबकि विपक्ष का कहना है कि केवल कानून पर्याप्त नहीं, बल्कि जवाबदेही, पारदर्शिता और संस्थागत सुधार भी जरूरी हैं. अब नजर इस बात पर रहेगी कि बहस के बाद विधेयक में क्या बदलाव होते हैं और सरकार परीक्षा प्रणाली में सुधार के अपने दावों को जमीन पर किस तरह लागू करती है.

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