100 दिन बाद बदली Balen Shah की कूटनीति! अब भारत और चीन के राजदूतों से करेंगे आमने-सामने मुलाकात
“अब तक विदेशी राजदूतों से व्यक्तिगत मुलाकात से बचने वाले नेपाल के प्रधानमंत्री बालेन शाह ने अपना रुख बदल दिया है. इस हफ्ते वह भारत और चीन के राजदूतों से अलग-अलग मुलाकात करेंगे.”

नेपाल के प्रधानमंत्री बालेन शाह अपनी सरकार के पहले 100 दिन पूरे होने के बाद एक बड़ा कूटनीतिक बदलाव करने जा रहे हैं. पद संभालने के बाद उन्होंने यह नीति अपनाई थी कि वह किसी भी विदेशी राजदूत या वरिष्ठ प्रतिनिधि से वन-ऑन-वन (One-on-One) मुलाकात नहीं करेंगे. लेकिन अब उन्होंने अपने इसी फैसले को बदलने का संकेत दिया है. राजनयिक सूत्रों के अनुसार, इस सप्ताह बालेन शाह भारत के राजदूत नवीन श्रीवास्तव और चीन के राजदूत झांग माओमिंग से अलग-अलग द्विपक्षीय मुलाकात करेंगे. खास बात यह है कि दोनों बैठकें एक ही दिन आयोजित करने की तैयारी है, ताकि किसी भी तरह का कूटनीतिक असंतुलन या पक्षपात का संदेश न जाए.
पहले क्यों नहीं मिलते थे विदेशी राजदूतों से?
27 मार्च को प्रधानमंत्री बनने के बाद बालेन शाह ने पारंपरिक कूटनीतिक तरीके से अलग राह चुनी थी. उन्होंने किसी भी देश के राजदूत से व्यक्तिगत मुलाकात करने के बजाय केवल सामूहिक बैठकों को प्राथमिकता दी. अप्रैल और मई के दौरान उन्होंने काठमांडू में कई देशों के राजदूतों से समूह बैठकें कीं. इतना ही नहीं, उन्होंने अमेरिका के वरिष्ठ राजनयिकों और भारत के विदेश सचिव विक्रम मिस्री से भी व्यक्तिगत मुलाकात नहीं की थी. उस समय उनके समर्थकों ने इसे पारदर्शी और स्वाभिमानी विदेश नीति का हिस्सा बताया था.
अब क्यों बदला रुख?
सरकार के 100 दिन पूरे होने के बाद प्रधानमंत्री बालेन शाह के रवैये में बदलाव देखने को मिल रहा है. हाल के दिनों में उन्होंने देश के उद्योगपतियों, व्यापारिक संगठनों और ठेकेदारों से भी व्यक्तिगत मुलाकातें शुरू की हैं. प्रधानमंत्री कार्यालय से जुड़े अधिकारियों का कहना है कि नेपाल की विदेश नीति में भारत और चीन दोनों की अहम भूमिका है. ऐसे में दोनों देशों के राजदूतों के साथ सीधे संवाद की शुरुआत करना एक व्यावहारिक और जरूरी कदम माना जा रहा है.
भारत-चीन के बीच संतुलन का संदेश
नेपाल का विदेश मंत्रालय इस बात का विशेष ध्यान रख रहा है कि दोनों देशों के साथ समान व्यवहार का संदेश जाए. इसी वजह से भारतीय और चीनी राजदूत के साथ बैठकें एक ही दिन आयोजित करने की तैयारी की जा रही है. राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि यह फैसला बालेन शाह की विदेश नीति में एक नए चरण की शुरुआत का संकेत हो सकता है. आने वाले समय में इन मुलाकातों से नेपाल के अपने दोनों पड़ोसी देशों के साथ रिश्तों की दिशा पर भी असर पड़ सकता है.



