24 अगस्त से ‘भर्ती व्यवस्था सुधार यात्रा’ का ऐलान, CM House घेराव की भी चेतावनी
झारखंड में भर्ती परीक्षाओं में कथित गड़बड़ियों के खिलाफ आंदोलन कर रहे अभ्यर्थियों ने 24 अगस्त से ‘भर्ती व्यवस्था सुधार यात्रा’ शुरू करने का ऐलान किया है. देवेंद्र नाथ महतो के नेतृत्व में शुरू होने वाली यह यात्रा राज्य के सभी 24 जिलों तक पहुंचेगी.

Ranchi: झारखंड में भर्ती परीक्षाओं को लेकर आंदोलन कर रहे अभ्यर्थियों ने आंदोलन को और तेज करने का ऐलान किया है. देवेंद्र नाथ महतो के नेतृत्व में आंदोलनरत अभ्यर्थियों ने प्रेस कॉन्फ्रेंस कर भर्ती परीक्षाओं में कथित भ्रष्टाचार, अनियमितता और अपारदर्शिता की निष्पक्ष जांच की मांग की. अभ्यर्थियों ने कहा कि योग्य और निर्दोष छात्रों के भविष्य के साथ अन्याय नहीं होना चाहिए. इसी मांग को लेकर 24 अगस्त से ‘भर्ती व्यवस्था सुधार यात्रा’ शुरू की जाएगी. यात्रा की शुरुआत नेमरा से होगी और इसे राज्य के सभी 24 जिलों तक ले जाने की योजना है. अभ्यर्थियों ने मांगें पूरी नहीं होने पर मुख्यमंत्री आवास के घेराव और राज्यव्यापी अनिश्चितकालीन चक्का जाम की चेतावनी भी दी है.
26 दिनों से जारी है अभ्यर्थियों का आंदोलन
भर्ती परीक्षाओं में कथित गड़बड़ियों और अनियमितताओं के खिलाफ अभ्यर्थी पिछले 26 दिनों से आंदोलन कर रहे हैं. प्रेस कॉन्फ्रेंस में 11वीं से 13वीं JPSC, JSSC-CGL समेत विभिन्न प्रतियोगी परीक्षाओं में शामिल अभ्यर्थियों ने अपनी मांगें रखीं. आंदोलनकारियों का कहना है कि 25 जुलाई से सत्याग्रह और 2 अगस्त से भूख हड़ताल के जरिए सरकार का ध्यान भर्ती व्यवस्था की खामियों की ओर आकर्षित किया गया. अभ्यर्थियों के मुताबिक, सरकार ने 17 अगस्त को 45 विवादित परीक्षाओं को लेकर कार्रवाई की घोषणा की थी. इसमें 22 परीक्षाओं को रद्द करने, 17 परीक्षाओं की जांच कराने और 6 परीक्षाओं की प्रक्रिया स्थगित करने की बात कही गई. हालांकि, छात्रों का कहना है कि कई महत्वपूर्ण मामलों में अभी भी उन्हें अपेक्षित न्याय नहीं मिला है.
JPSC और JSSC-CGL मामलों में सरकार से मजबूती से पक्ष रखने की मांग
आंदोलनरत अभ्यर्थियों ने 11वीं से 13वीं JPSC, फूड सेफ्टी ऑफिसर, CDPO और JSSC-CGL समेत कई मामलों को लेकर सरकार की भूमिका पर सवाल उठाए. उनका आरोप है कि न्यायालय में सरकार की ओर से CID जांच और कथित अनियमितताओं से जुड़े तथ्यों को प्रभावी तरीके से नहीं रखा गया. अभ्यर्थियों का कहना है कि इससे संबंधित मामलों में अदालत से रोक लगने के बाद आंदोलनकारियों में नाराजगी बढ़ी है. उन्होंने सरकार से मांग की कि वह अदालत के समक्ष सभी तथ्यों को मजबूती से रखे, ताकि भर्ती परीक्षाओं में कथित अनियमितताओं से प्रभावित योग्य अभ्यर्थियों के हितों की रक्षा हो सके. छात्रों का कहना है कि उनका उद्देश्य किसी निर्दोष या योग्य चयनित अभ्यर्थी के खिलाफ कार्रवाई कराना नहीं, बल्कि पूरी भर्ती प्रक्रिया को पारदर्शी और निष्पक्ष बनाना है.
24 अगस्त से शुरू होगी ‘भर्ती व्यवस्था सुधार यात्रा’
अभ्यर्थियों ने आंदोलन के अगले चरण के तहत 24 अगस्त से ‘भर्ती व्यवस्था सुधार यात्रा’ शुरू करने की घोषणा की है. आंदोलनकारियों के मुताबिक, यात्रा की शुरुआत दिशोम गुरु शिबू सोरेन के पैतृक गांव नेमरा से की जाएगी. इसके बाद यात्रा को राज्य के सभी 24 जिलों के जिला मुख्यालयों तक ले जाने की योजना है. इसके अलावा प्रमुख चौक-चौराहों, विश्वविद्यालयों और लाइब्रेरी क्षेत्रों में भी छात्रों से संपर्क किया जाएगा. अभ्यर्थियों का कहना है कि इस यात्रा का उद्देश्य भर्ती व्यवस्था में कथित अनियमितताओं को लेकर छात्रों और आम लोगों को जागरूक करना है. साथ ही सरकार पर भर्ती प्रक्रिया में व्यापक और स्थायी सुधार के लिए दबाव बनाना भी आंदोलन का प्रमुख उद्देश्य है. यात्रा के जरिए आंदोलन को राज्यव्यापी स्वरूप देने की तैयारी है.
15 सितंबर की सुनवाई को लेकर सरकार को चेतावनी
आंदोलनरत अभ्यर्थियों ने 15 सितंबर को होने वाली अगली न्यायिक सुनवाई को लेकर भी सरकार से अपनी भूमिका स्पष्ट करने की मांग की है. छात्रों का कहना है कि भर्ती परीक्षाओं से जुड़े मामलों में सरकार को अदालत के सामने CID जांच और अन्य तथ्यों को मजबूती से रखना चाहिए. उनका आरोप है कि सरकार की ओर से प्रभावी पैरवी नहीं होने से योग्य अभ्यर्थियों के हित प्रभावित हो सकते हैं. अभ्यर्थियों ने चेतावनी दी है कि यदि सरकार ने आगामी सुनवाई में मजबूती से अपना पक्ष नहीं रखा, तो आंदोलन को और व्यापक किया जाएगा. इसी क्रम में मुख्यमंत्री आवास के घेराव और पूरे राज्य में अनिश्चितकालीन चक्का जाम जैसे कदम उठाने की चेतावनी दी गई है. हालांकि, इन कदमों की वास्तविक रूपरेखा और समय आंदोलन की आगामी रणनीति पर निर्भर करेगा.
‘लड़ाई योग्य अभ्यर्थियों के खिलाफ नहीं’
अभ्यर्थियों ने स्पष्ट किया कि उनका आंदोलन उन छात्रों के खिलाफ नहीं है, जिन्होंने निष्पक्ष तरीके से परीक्षा पास कर चयन हासिल किया है. उनका कहना है कि आंदोलन का उद्देश्य भर्ती व्यवस्था से कथित भ्रष्टाचार, पेपर लीक, धांधली और अनियमितताओं को खत्म करना है. आंदोलनकारियों ने सरकार से मांग की कि कथित रूप से दागदार मामलों और निर्दोष अभ्यर्थियों के बीच स्पष्ट अंतर किया जाए. उनका कहना है कि यदि किसी परीक्षा या भर्ती प्रक्रिया में गड़बड़ी सामने आती है तो उसकी निष्पक्ष जांच होनी चाहिए और दोषियों पर कार्रवाई की जानी चाहिए, लेकिन योग्य अभ्यर्थियों के भविष्य को नुकसान नहीं पहुंचना चाहिए. छात्रों ने सरकार से ऐसी व्यवस्था बनाने की मांग की है, जिसमें जांच के दौरान निर्दोष और योग्य अभ्यर्थियों के हित सुरक्षित रहें.
कई अन्य परीक्षाओं की जांच की भी मांग
आंदोलनरत अभ्यर्थियों ने JSSC-CGL, JPSC और CDPO के अलावा कई अन्य भर्ती परीक्षाओं में कथित अनियमितताओं की जांच की मांग की है. इनमें PGT, नगर पालिका, लैब असिस्टेंट, उत्पाद सिपाही, फील्ड वर्कर और आशुलिपिक जैसी परीक्षाएं शामिल हैं. छात्रों का कहना है कि भर्ती व्यवस्था में पारदर्शिता सुनिश्चित करने के लिए केवल कुछ परीक्षाओं की जांच पर्याप्त नहीं है. उनका आरोप है कि अलग-अलग परीक्षाओं में सामने आई शिकायतों की निष्पक्ष जांच होनी चाहिए. अभ्यर्थियों ने सरकार से मांग की कि जिन भी परीक्षाओं में गड़बड़ी की शिकायतें या तथ्य सामने आए हैं, उनकी स्वतंत्र और निष्पक्ष जांच कराई जाए. इसके साथ ही दोषी पाए जाने वाले लोगों के खिलाफ कार्रवाई की जाए, ताकि भविष्य में ऐसी घटनाओं की पुनरावृत्ति न हो.
पेपर लीक और पैरवी रोकने के लिए स्थायी व्यवस्था की मांग
छात्र नेताओं ने भविष्य की प्रतियोगी परीक्षाओं को लेकर सरकार से ठोस व्यवस्था और स्पष्ट गारंटी की मांग की है. उनका कहना है कि पेपर लीक, परीक्षा में धांधली और पैरवी के जरिए नियुक्ति जैसी किसी भी संभावना को पूरी तरह खत्म किया जाना चाहिए. इसके लिए भर्ती प्रक्रिया में तकनीकी सुरक्षा, पारदर्शिता और जवाबदेही बढ़ाने की जरूरत है. आंदोलनकारियों का कहना है कि केवल परीक्षा रद्द करने या जांच कराने से समस्या का स्थायी समाधान नहीं होगा. सरकार को ऐसी व्यवस्था तैयार करनी चाहिए, जिससे अभ्यर्थियों को परीक्षा से लेकर परिणाम और नियुक्ति तक पूरी प्रक्रिया पर भरोसा हो. छात्रों ने कहा कि जब तक भर्ती व्यवस्था में स्थायी सुधार नहीं किया जाता, तब तक उनका आंदोलन जारी रहेगा.
महापुरुषों के संघर्ष से प्रेरणा लेने का दावा
आंदोलनरत अभ्यर्थियों ने कहा कि उनका आंदोलन झारखंड के प्रमुख जननेताओं और महापुरुषों के संघर्ष एवं विचारों से प्रेरणा लेते हुए आगे बढ़ाया जाएगा. उन्होंने विनोद बाबू, गुरुजी शिबू सोरेन, निर्मल महतो, भगवान बिरसा मुंडा और सिदो-कान्हू का उल्लेख करते हुए कहा कि आंदोलन का उद्देश्य युवाओं और अभ्यर्थियों के अधिकारों के लिए संघर्ष करना है. छात्रों ने दोहराया कि उनकी मांग भर्ती व्यवस्था में पारदर्शिता, निष्पक्षता और स्थायी सुधार की है. आंदोलनकारियों के अनुसार, योग्य और निर्दोष अभ्यर्थियों के भविष्य की सुरक्षा के साथ किसी भी तरह का समझौता नहीं होना चाहिए. अब 24 अगस्त से शुरू होने वाली ‘भर्ती व्यवस्था सुधार यात्रा’ के जरिए आंदोलन को राज्य के विभिन्न हिस्सों तक पहुंचाने की तैयारी है. सरकार की प्रतिक्रिया और आगामी न्यायिक सुनवाई के बाद आंदोलन की अगली दिशा तय होने की संभावना है.

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