तिब्बत से आया सैलाब नेपाल में छोड़ गया तबाही के निशान, तिमुरे बाजार का नामोनिशान मिटा; 41 सुरक्षाकर्मी संपर्क से बाहर
तिब्बत की ओर से आए अचानक बाढ़ के पानी ने नेपाल के रसुवा जिले में भारी तबाही मचा दी. तिमुरे और स्याप्रुबेसी में घर, सड़क, पुल और हाइड्रो पावर परियोजनाएं प्रभावित हुई हैं, जबकि दर्जनों सुरक्षाकर्मी और कस्टम कर्मचारी संपर्क से बाहर हैं.


Kathmandu: नेपाल-तिब्बत सीमा पर बुधवार सुबह भोटे कोशी नदी में अचानक आई बाढ़ ने रसुवा जिले में भारी तबाही मचा दी. तिमुरे और स्याप्रुबेसी इलाके में पानी इतनी तेजी से आया कि लोगों को संभलने तक का मौका नहीं मिला. तिमुरे बाजार के बड़े हिस्से के बह जाने की खबर है. घरों, दुकानों, पुलिस चौकियों, सीमा शुल्क कार्यालय और सड़कों के साथ कई हाइड्रो पावर परियोजनाएं भी बाढ़ की चपेट में आई हैं. शुरुआती जानकारी में 28 सुरक्षाकर्मियों के संपर्क से बाहर होने की बात सामने आई थी, लेकिन बाद के सरकारी अपडेट में यह संख्या बढ़कर 41 बताई गई. इसके अलावा रसुवा कस्टम्स के 14 कर्मचारी भी संपर्क में नहीं हैं. नेपाल सरकार ने सेना, पुलिस और सशस्त्र पुलिस बल को राहत-बचाव में उतार दिया है. भोटे कोशी से आगे त्रिशूली नदी में बढ़े पानी को देखते हुए नुवाकोट, धादिंग और नीचे के इलाकों में भी अलर्ट कर दिया गया है.
सुबह साढ़े आठ बजे ऐसा आया पानी, लोग जान बचाकर भागे
रसुवा के तिमुरे इलाके में बुधवार सुबह करीब 8:30 से 9 बजे के बीच अचानक तेज बहाव आया. स्थानीय लोगों ने बताया कि पहले तेज गर्जना जैसी आवाज सुनाई दी और देखते ही देखते पानी बस्ती की तरफ बढ़ने लगा. तिमुरे वार्ड के स्थानीय प्रतिनिधि के मुताबिक लोगों को सुरक्षित जगह पहुंचने के लिए बेहद कम समय मिला. तिमुरे कस्टम्स के प्रमुख राजेंद्र ढुंगाना ने स्थानीय मीडिया को बताया कि अचानक ऐसा लगा जैसे भूकंप आ गया हो. इसके बाद जोरदार आवाज के साथ पानी ऊपर से नीचे की ओर आया और कर्मचारी जान बचाने के लिए भागे. स्थानीय प्रतिनिधियों के मुताबिक तिमुरे बाजार में अब बड़ी तबाही है और कई लोगों के बारे में जानकारी जुटाई जा रही है. बाढ़ का पानी तिब्बत की तरफ से भोटे कोशी में आया बताया जा रहा है. नेपाल के बाढ़ पूर्वानुमान विभाग के अनुसार दोपहर तक पानी धादिंग के गलछी क्षेत्र तक पहुंच गया था और आगे त्रिशूली नदी के रास्ते नीचे जाने की आशंका जताई गई.

पुलिस चौकियां डूबीं, 41 सुरक्षाकर्मियों से संपर्क टूटा
बाढ़ ने रसुवा में सुरक्षा व्यवस्था को भी बुरी तरह प्रभावित किया है. तिमुरे एरिया पुलिस ऑफिस, स्याप्रुबेसी पुलिस पोस्ट और रसुवागढ़ी पुलिस पोस्ट को नुकसान पहुंचा है. शुरुआती रिपोर्ट में 28 सुरक्षाकर्मियों के संपर्क से बाहर होने की जानकारी आई थी. बाद में नेपाल सरकार के अपडेट में बताया गया कि कुल 41 सुरक्षा कर्मियों से संपर्क नहीं हो पा रहा है. इनमें नेपाल पुलिस और सशस्त्र पुलिस बल के जवान शामिल हैं. रसुवा सीमा क्षेत्र में तैनात सुरक्षाकर्मियों की स्थिति को लेकर बचाव दल लगातार तलाश कर रहे हैं. हालांकि अधिकारियों ने यह भी संकेत दिया है कि संपर्क टूटने का मतलब यह जरूरी नहीं कि सभी जवान बाढ़ में बह गए हों. कई इलाकों में मोबाइल नेटवर्क और संचार व्यवस्था प्रभावित हुई है. कुछ जवानों के सुरक्षित स्थान पर चले जाने की संभावना भी जताई गई है.

हाइड्रो पावर प्रोजेक्ट भी नहीं बच पाए
रसुवा की तबाही का असर सिर्फ बस्तियों तक सीमित नहीं है. बाढ़ ने नेपाल के पावर सेक्टर को भी बड़ा झटका दिया है. स्थानीय रिपोर्टों के मुताबिक एक हाइड्रो पावर परियोजना पूरी तरह बह गई, जबकि चिलिमे समेत कई परियोजनाओं को नुकसान पहुंचा है. नेपाल इलेक्ट्रिसिटी अथॉरिटी के मुताबिक रसुवागढ़ी, चिलिमे और त्रिशूली-3ए हाइड्रो पावर प्लांट के साथ 220 केवी सबस्टेशन और ट्रांसमिशन ढांचे को भी नुकसान हुआ है. कुछ इलाकों में बिजली आपूर्ति बाधित हुई है. यानी बाढ़ का असर सिर्फ तत्काल राहत तक सीमित नहीं रहने वाला, बल्कि बिजली उत्पादन और ट्रांसमिशन पर भी पड़ सकता है.

60 घर और दो पुल बहने की खबर, सीमा कारोबार पर भी असर
भोटे कोशी के तेज बहाव ने नदी किनारे बने घरों और संपर्क मार्गों को अपनी चपेट में लिया है. नेपाल न्यूज की रिपोर्ट के मुताबिक करीब 60 घर और दो पुल बह गए हैं. कई इलाकों में संपर्क टूटने से प्रशासन को नुकसान का सही आंकड़ा जुटाने में परेशानी हो रही है. तिमुरे नेपाल-चीन सीमा व्यापार का अहम इलाका है. यहां सीमा शुल्क कार्यालय और उससे जुड़े ढांचे को नुकसान पहुंचने से नेपाल-चीन व्यापारिक आवाजाही पर भी असर पड़ने की आशंका है. वित्त मंत्रालय ने तिमुरे कस्टम्स और संबंधित एजेंसियों के साथ मिलकर खोज एवं बचाव अभियान की निगरानी शुरू कर दी है.
त्रिशूली किनारे बसी बस्तियों में भी खतरा, सेना के हेलिकॉप्टर उतरे
बाढ़ का पानी नीचे की तरफ बढ़ने के साथ खतरा रसुवा से बाहर निकल गया है. त्रिशूली नदी के किनारे बसे नुवाकोट और धादिंग के इलाकों में लोगों को सतर्क किया गया है. प्रशासन ने नदी किनारे और निचले इलाकों में रहने वालों से सुरक्षित और ऊंची जगहों पर जाने को कहा है. नेपाल सरकार ने सेना, नेपाल पुलिस और सशस्त्र पुलिस बल की टीमें तैनात की हैं. दो नेपाली सेना के हेलिकॉप्टर मेडिकल टीमों के साथ प्रभावित क्षेत्रों में भेजे गए हैं. निजी हेलिकॉप्टरों को भी तैयार रखा गया है. राहत दलों की प्राथमिकता लापता लोगों की तलाश, फंसे हुए लोगों को निकालना और प्रभावित इलाकों तक जरूरी मदद पहुंचाना है. अभी इस आपदा में कितने लोगों की मौत हुई या कितने लोग घायल हैं, इसका आधिकारिक आंकड़ा सामने नहीं आया है. बाढ़ का कारण भी पूरी तरह साफ नहीं है. मौसम विभाग से जुड़े अधिकारियों के मुताबिक नेपाल की तरफ भारी बारिश इस बाढ़ की पर्याप्त वजह नहीं दिखती और तिब्बत की तरफ हुई बारिश को लेकर भी जांच की जा रही है. कुछ रिपोर्टों में ग्लेशियल लेक आउटबर्स्ट फ्लड यानी ग्लेशियल झील फटने की संभावना का जिक्र है, लेकिन इसकी अभी पुष्टि नहीं हुई है.

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