UP में सत्ता से टकराई महिला दारोगा, विधायक पर गंभीर आरोप लगाकर छोड़ी वर्दी
“उत्तर प्रदेश के उन्नाव से एक सनसनीखेज मामला सामने आया है, जहां महिला दारोगा रेखा दुबे ने अपने ही विभाग, सत्ता और सिस्टम से लड़ते-लड़ते वर्दी उतारने का फैसला कर दिया. ”

उत्तर प्रदेश के उन्नाव से एक सनसनीखेज मामला सामने आया है, जहां महिला दारोगा रेखा दुबे ने अपने ही विभाग, सत्ता और सिस्टम से लड़ते-लड़ते वर्दी उतारने का फैसला कर दिया. उन्होंने इंसाफ की मांग के लिए दो साल तक प्रशासन से जूझा, लेकिन जब उन्हें न्याय नहीं मिला तो उन्होंने इस्तीफा दे दिया. रेखा दुबे ने सीधे तौर पर लखीमपुर खीरी के सदर विधायक Yogesh Verma पर गंभीर आरोप लगाए हैं. उनका कहना है कि विधायक ने उनके पति पर अनैतिक दबाव बनाया और फिर पुलिस के कुछ कर्मी उनके खिलाफ साजिश में शामिल हुए. रेखा के मुताबिक, तब से उनका परिवार लगातार प्रताड़ित किया गया, झूठे नशे का मेडिकल दिखाया गया और सिस्टम ने सहयोग की जगह मुश्किलें बढ़ाईं. अब उन्होंने इस्तीफा देकर अपनी लड़ाई कानून के दायरे से बाहर लड़ने की बात कही है, जिससे यह मामला और गहराता दिख रहा है.
अनैतिक दबाव और प्रताड़ना का आरोप
महिला दारोगा रेखा दुबे ने आरोप लगाया कि जब वह लखीमपुर खीरी में तैनात थीं, तब उनके पति अभय मिश्र को सदर क्षेत्र की चौकी में पोस्ट किया गया था. रेखा के मुताबिक, विधायक योगेश वर्मा ने उनके पति पर अनैतिक कार्य के लिए दबाव बनाने की कोशिश की. विरोध करने पर विधायक ने अपने प्रभाव का इस्तेमाल करते हुए प्रताड़ना शुरू कर दी. आरोप है कि तत्कालीन कप्तान के ड्राइवर और कुछ पुलिस कर्मी भी इस साजिश में शामिल रहे, जिन्होंने अभय मिश्र को धमकाया और उन्हें परेशान किया.
विधायक और उनके साथियों द्वारा शराब पार्टी का बहाना बनाकर ताज़ी घटनाओं को भड़काया गया. 29 मार्च 2024 की रात भी आरोपियों ने शराब पार्टियों में शामिल होकर स्थिति को खोला और जब अभय मिश्र घर लौटे तो सिपाही द्वारा उनके साथ अपमानजनक तरीके से पेश आने का आरोप लगाया गया. इसके बाद रेखा और उनकी बेटी को भी घर में जबरन घुसकर पीटा गया और उन पर शराब डालने का दावा भी किया गया.
सिस्टम ने दिया झूठा मेडिकल रिपोर्ट
इस पूरे विवाद में सबसे गंभीर आरोप यह है कि विधायक के दबाव में पुलिस विभाग के उच्च अधिकारियों ने फर्जी तौर पर मेडिकल रिपोर्ट तैयार करवा दी, जिसमें अभय मिश्र को नशे की हालत में दिखाया गया. रेखा का कहना है कि यह रिपोर्ट झूठी थी और इसका मकसद उनके पति की छवि को खराब करना था. उन्होंने कहा कि वह लगातार न्याय पाने की कोशिश करती रहीं, लेकिन उनके खिलाफ ही विभाग और सिस्टम ने उत्पीड़न बढ़ाया.
रेखा दुबे ने बताया कि जब उन्हें बार-बार परेशान किया जाता रहा, तब उन्होंने सिस्टम और पुलिस वर्दी से इस्तीफा देकर अपनी लड़ाई खुद लड़ने का निर्णय लिया. उनका कहना है कि अब वह कानूनी रास्ते से बाहर जाकर सच को उजागर करेंगी और अपने परिवार को न्याय दिलाने की कोशिश करेंगी.
इस मामले ने यह सवाल खड़ा कर दिया है कि क्या सत्ता, दबाव और प्रभाव का इस्तेमाल कानून प्रवर्तन एजेंसियों के बीच गलत तरीके से हो रहा है? क्या एक साधारण परिवार को राजनीतिक और प्रशासनिक दवाब का सामना करना चाहिए? अब यह मामला तूल पकड़ रहा है और सभी की निगाहें अब इस पर हैं कि प्रशासन और कानून व्यवस्था क्या कार्रवाई करता है.




